'यह करोड़ों कमाने की स्क्रिप्ट है', दिलजीत दोसांझ पर रवनीत बिट्टू का बड़ा हमला; सतलुज मूवी विवाद पर दिया बड़ा बयान

केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी फिल्म को लेकर दिलजीत दोसांझ पर तीखा हमला बोला. उन्होंने फिल्म, ओटीटी विवाद और कई पुराने मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से रखी.

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Kanhaiya Kumar Jha

चंडीगढ़: केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने लुधियाना दौरे के दौरान जसवंत सिंह खालड़ा पर आधारित फिल्म और उससे जुड़े ओटीटी विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने दिलजीत की मंशा, फिल्म के उद्देश्य और उससे जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठाए. साथ ही पंजाब की राजनीति और 1984 से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया.

लुधियाना में मीडिया से बातचीत के दौरान रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा पर बनी फिल्म किसी सामाजिक उद्देश्य से नहीं बनाई गई, बल्कि इसका मकसद आर्थिक लाभ और प्रचार हासिल करना है. उन्होंने दिलजीत दोसांझ पर निशाना साधते हुए उनकी मंशा और भूमिका पर सवाल उठाए.

ओटीटी विवाद पर भी उठाए सवाल

बिट्टू ने दावा किया कि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाया जाना किसी सरकारी दबाव का परिणाम नहीं था. उनके अनुसार, यह पूरी तरह प्रचार हासिल करने की रणनीति थी. उन्होंने कहा कि ओटीटी मंचों पर सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं होता और निर्माता अपनी सुविधा के अनुसार फिल्म जारी कर सकते हैं.


1984 और चमकीला फिल्म का किया जिक्र

केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में 1984 के सिख विरोधी दंगों और अभिनेता अमिताभ बच्चन का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दिलजीत दोसांझ पहले फिल्म 'चमकीला' में काम करते हैं और बाद में सिख समाज के दर्द की बात करते हैं. उन्होंने इस विरोधाभास को लेकर भी सवाल उठाए और अपनी आपत्ति दर्ज कराई.

बेअंत सिंह और खालड़ा मामले पर बयान

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के खिलाफ तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के कार्यकाल में कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. उनके अनुसार, बेअंत सिंह की शहादत के बाद की परिस्थितियों में घटनाक्रम बदला. उन्होंने इतिहास को तथ्यों के साथ देखने की अपील भी की.

बीजेपी नेताओं को भी दी सलाह

बिट्टू ने अपने संबोधन में पंजाब बीजेपी के नेताओं को भी सलाह दी. उन्होंने कहा कि 1980 से 1995 के बीच की घटनाओं को लेकर बीजेपी को अनावश्यक सफाई देने की जरूरत नहीं है. उनके अनुसार, उस समय न तो पंजाब में और न ही केंद्र में बीजेपी की सरकार थी. इसलिए पार्टी को इन मामलों में स्पष्ट और आत्मविश्वास के साथ अपना पक्ष रखना चाहिए.