चंडीगढ़: पंजाब के बरनाला जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां रसोई गैस की भारी कमी एक बुजुर्ग की जान पर भारी पड़ गई. सहना गांव के निवासी भूषण कुमार मित्तल शुक्रवार सुबह गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी पहुंचे थे, लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते समय वे अचानक गिर पड़े. पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण क्षेत्र में गैस की भारी किल्लत की खबरें आ रही हैं, जिससे आम जनता के बीच काफी अफरातफरी और बेचैनी का माहौल है.
66 वर्षीय भूषण कुमार मित्तल अपने परिवार के लिए गैस जुटाने के लिए सुबह 7.15 बजे ही एजेंसी पहुंच गए थे. हालांकि, गैस की कमी के कारण वहां पहले से ही भारी भीड़ जमा थी. कई लोग तो सुबह 6 बजे से ही अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे. पुलिस के अनुसार, मित्तल साहब कतार में 25वें स्थान पर थे, लेकिन कुछ ही समय में वहां 130 से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई थी.
चश्मदीदों का कहना है कि गैस एजेंसी खुलने ही वाली थी कि करीब 8 बजे भूषण कुमार अचानक जमीन पर गिर पड़े. सहना थाने की प्रभारी रेनू ने बताया कि उन्हें तुरंत संभालने की कोशिश की गई, लेकिन एजेंसी खुलने से चंद मिनट पहले ही उनका निधन हो गया. कतार में खड़े अन्य लोग इस घटना से बेहद स्तब्ध हैं. स्थानीय निवासियों का मानना है कि गैस की कमी ने लोगों को मानसिक रूप से थका दिया है.
भूषण कुमार अपने गांव में ही एक छोटी सी किराने की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे. उनके भतीजे रमन मित्तल ने बताया कि उनके चाचा लगभग 40 मिनट से कतार में खड़े थे. रमन का आरोप है कि इलाके में गैस की भारी किल्लत ही इस दुखद घटना का मुख्य कारण बनी. भूषण मित्तल अपने पीछे पत्नी और एक शादीशुदा बेटी को छोड़ गए हैं. परिवार इस समय गहरे सदमे और दुख में डूबा हुआ है.
रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब के इस क्षेत्र में रसोई गैस की कमी के पीछे पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिसका सीधा खामियाजा स्थानीय नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है. लोग इस बात को लेकर आशंकित हैं कि आने वाले दिनों में किल्लत और बढ़ सकती है, जिसके कारण वे लंबी कतारों में लगने को मजबूर हैं.
पुलिस ने घटना के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं. इस दुखद मौत के बाद इलाके में गैस वितरण प्रणाली और सरकारी आपूर्ति को लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है. स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को संभालने का आश्वासन दिया है, लेकिन गैस की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. यह घटना दर्शाती है कि वैश्विक संकट किस तरह आम आदमी के जीवन को प्रभावित करते हैं.