क्या बदलेंगे सियासी समीकरण? पंजाब चुनाव से पहले फिर चर्चा में आया डेरा फैक्टर; हरियाणा में भी होने हैं निकाय चुनाव
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव और हरियाणा में होने वाले निकाय चुनाव से पहले डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव फिर चर्चा में है. राम चंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को मिली राहत के बाद राजनीतिक हलकों में नए समीकरणों की बात हो रही है.
चंडीगढ़: पत्रकार राम चंद्र छत्रपति मर्डर केस में बरी होने से राजनीतिक गलियारों में गर्मी बढ़ गई है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं और राजनीतिक पार्टियां अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही हैं. हरियाणा में भी अगले महीने निकाय चुनाव होने हैं और इन चुनावों का ऐलान बहुत जल्द हो सकता है.
पंजाब और हरियाणा की राजनीति में डेरा सच्चा सौदा का असर लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है. दोनों राज्यों के कई असरदार नेता डेरा का आशीर्वाद लेने आ चुके हैं. पंजाब के मालवा इलाके खासकर बठिंडा, मानसा, फरीदकोट, मुक्तसर, संगरूर और फाजिल्का जैसे जिलों में डेरा के मानने वालों की बड़ी संख्या मानी जाती है.
क्या चुनावी नतीजों पर डाल सकते हैं असर?
इन इलाकों में कई विधानसभा सीटों पर डेरा समर्थकों की संख्या इतनी ज्यादा है कि वे चुनावी नतीजों पर असर डाल सकते हैं. पिछले पंजाब चुनावों में कई राजनीतिक पार्टियों ने डेरा समर्थकों का समर्थन पाने की कोशिश की है.
हरियाणा में क्या पड़ेगा इसका असर?
इसी तरह हरियाणा में पंजाब की सीमा से लगे सिरसा, अंबाला, कुरुक्षेत्र और हिसार के सीमावर्ती इलाके हैं. गुरमीत राम रहीम को मिली कानूनी राहत का उनके समर्थकों पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकता है. साध्वियों के रेप के आरोप में डेरा प्रमुख अभी जेल में ही रहेंगे लेकिन इस फैसले से उनके समर्थकों में एक अच्छा संदेश जा सकता है.
अगर डेरा लीडरशिप किसी राजनीतिक पार्टी का खुलकर समर्थन करती है, तो मालवा इलाके की कई सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं.
पंजाब की राजनीति में क्या पड़ेगा असर?
इसका एक और पहलू भी है. पंजाब की राजनीति में लंबे समय से सिख धार्मिक संगठनों और डेरा परंपराओं के बीच विचारधारा का टकराव रहा है. इसलिए अगर किसी राजनीतिक पार्टी को डेरा समर्थकों का खुला समर्थन मिलता है, तो इससे कुछ सिख वोटरों में नेगेटिव रिएक्शन हो सकता है. हालांकि यह तो वक्त ही बताएगा कि डेरा किसे समर्थन देता है. अगले साल पंजाब में चुनाव होने हैं.
दूसरी पार्टियों की क्या है स्थिति?
BJP और दूसरी पार्टियों ने चुनावों के लिए कमर कस ली है. इस बार हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. वे पिछले कई महीनों से लगातार पंजाब का दौरा कर रहे हैं, जिससे वे पंजाब में चर्चा के केंद्र में हैं.
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