पंजाब चुनाव से पहले डेरा बल्लां फिर चर्चा में, मोदी-राहुल-केजरीवाल भी टेक चुके हैं माथा
जालंधर का डेरा सचखंड बल्लां दोआबा की राजनीति में प्रभावशाली सामाजिक केंद्र बन चुका है. डेरा सीधे किसी दल का समर्थन नहीं करता, फिर भी बड़े नेता यहां संत निरंजन दास का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में कुछ धार्मिक और सामाजिक संस्थानों का प्रभाव चुनावी राजनीति से अलग होकर भी दिखाई देता है. जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां इसका प्रमुख उदाहरण है. डेरा प्रबंधन किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के समर्थन की अपील नहीं करता, लेकिन दोआबा के बड़े हिस्से में इसकी संगत का सामाजिक आधार राजनीतिक दलों के लिए अहम माना जाता है. जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर और कपूरथला की करीब 23 विधानसभा सीटों पर रविदासिया समाज की मजबूत मौजूदगी इसे चुनावी नजरिए से महत्वपूर्ण बनाती है.
डेरा सचखंड बल्लां लंबे समय से गुरु रविदास नामलेवा संगत के प्रमुख केंद्रों में शामिल है. पंजाब में दलित आबादी करीब 32 प्रतिशत बताई जाती है. राज्य की 117 विधानसभा सीटों में 34 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. दोआबा क्षेत्र में रविदासिया समाज की मजबूत उपस्थिति के कारण डेरा से जुड़ी संगत को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है. यही वजह है कि चुनावी मौसम में अलग-अलग दलों के नेता डेरा तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं.
पीएम मोदी की यात्राओं से बढ़ी चर्चा
2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डेरा बल्लां से जुड़ी यात्राओं ने इसे फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया. एक फरवरी को गुरु रविदास जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री डेरा पहुंचे और संत निरंजन दास से मुलाकात की. उन्होंने संत का आशीर्वाद लिया. इसके बाद संत निरंजन दास को पद्मश्री से सम्मानित किया गया. 17 जुलाई को जालंधर दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने गुरु रविदास महाराज के नाम पर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई और संत निरंजन दास से फिर मुलाकात की.
Also Read
कांग्रेस से अकाली दल और आप तक पहुंचे नेता
डेरा बल्लां की राजनीतिक अहमियत किसी एक दल तक सीमित नहीं रही है. जनवरी 2017 में राहुल गांधी यहां पहुंचे थे. 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी डेरा में संत से मुलाकात की और रात में रुके. दिसंबर 2021 में हरसिमरत कौर बादल यहां पहुंचीं. इसके अगले दिन अरविंद केजरीवाल ने संत निरंजन दास से मुलाकात की. 2023 में केजरीवाल और भगवंत मान ने डेरा परिसर में बाणी अध्ययन केंद्र की आधारशिला रखी.
भाजपा भी बना रही है अपनी मौजूदगी
डेरा से भाजपा नेताओं का जुड़ाव भी लगातार सामने आता रहा है. जुलाई 2026 में पंजाब भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद केवल सिंह ढिल्लों ने डेरा पहुंचकर संत निरंजन दास से आशीर्वाद लिया. इससे पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कई नेता भी यहां आते रहे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू, अरुणा चौधरी और मोहिंदर सिंह केपी जैसे नेताओं की यात्राएं भी इसी कड़ी का हिस्सा रही हैं. डेरा की खासियत यही है कि वह खुद को चुनावी राजनीति से दूर रखता है.
राजनीति से दूरी, फिर भी प्रभाव कायम
डेरा सचखंड बल्लां की भूमिका को समझने के लिए उसका राजनीतिक तटस्थ रहना सबसे अहम पहलू है. डेरा की ओर से न किसी दल के पक्ष में अपील होती है और न चुनावी समर्थन का कोई औपचारिक संदेश दिया जाता है. इसके बावजूद संत से मुलाकात और आशीर्वाद लेना नेताओं के लिए सामाजिक संदेश माना जाता है. दोआबा में मजबूत रविदासिया आधार और पंजाब के बड़े दलित मतदाता वर्ग के कारण डेरा बल्लां आने वाले समय में भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रह सकता है.