मुरैना में कब रुकेगा रेत माफिया का आतंक? अवैध खनन रोकने की कोशिश कर रहे अधिकारी को ट्रैक्टर ने कुचला; आरोपी फरार
मध्य प्रदेश के मुरैना में अवैध रेत खनन रोकने गए वनकर्मी हरिकेश गुर्जर को ट्रैक्टर ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई. घटना ने चंबल क्षेत्र में सक्रिय रेत माफिया के बढ़ते आतंक को उजागर किया है.
मुरैना: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में आज अवैध रेत खनन को रोकने की कोशिश एक वनकर्मी की जान पर भारी पड़ गई. बुधवार को मुरैना में तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने वनरक्षक हरिकेश गुर्जर को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. यह घटना चंबल क्षेत्र में सक्रिय रेत माफिया के बढ़ते दुस्साहस को उजागर करती है.
हरिकेश गुर्जर अंबाह फॉरेस्ट रेंज की पेट्रोलिंग टीम का हिस्सा थे. टीम को रात से ही अवैध खनन रोकने के लिए अलर्ट पर रखा गया था. सूचना मिलने पर टीम ने नेशनल चंबल घड़ियाल अभयारण्य के प्रतिबंधित क्षेत्र में कार्रवाई शुरू की और नेशनल हाईवे 552 के पास राठोल का पुरा और रणपुर इलाके में चेकिंग पॉइंट बनाए.
क्या है पूरा मामला?
इसी दौरान अवैध रेत से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली वहां पहुंची. जैसे ही टीम ने उसे रोकने की कोशिश की, हरिकेश गुर्जर आगे बढ़े. तभी चालक ने वाहन की गति बढ़ा दी और उन्हें कुचलते हुए मौके से फरार हो गया.
सहकर्मियों ने तुरंत घायल वनकर्मी को जिला अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश जारी है.
सीसीटीवी फुटेज में क्या दे रहा दिखाई?
जांच में सीसीटीवी फुटेज अहम सुराग साबित हो सकता है. मुरैना जाने वाले रास्ते पर एक पेट्रोल पंप के कैमरे में संदिग्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली नजर आई है. फुटेज में वाहन तेज गति से आता और तुरंत निकलता दिखाई दे रहा है. अधिकारियों को शक है कि यही वाहन घटना में शामिल था.
BJP के प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा?
BJP के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस घटना को दुखद और निंदनीय बताया है और कहा कि इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने उठाया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें.
क्या पहले भी हुई ऐसी घटना?
चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन लंबे समय से बड़ी समस्या बना हुआ है. यहां पहले भी कई बार अधिकारी और सुरक्षाकर्मी माफिया के निशाने पर आ चुके हैं. 2012 में आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार को भी इसी तरह कुचलकर मार दिया गया था, जिससे देशभर में आक्रोश फैला था. इसके अलावा 2025 में भिंड और मुरैना में कई हमले सामने आए, जिनमें अधिकारी बाल-बाल बचे या गंभीर रूप से घायल हुए.
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