हार के बाद BJP का बड़ा एक्शन, दतिया की पूरी जिला कार्यकारिणी भंग; जिला अध्यक्ष भी हटाए गए

दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाया है. पूरी जिला कार्यकारिणी और सभी स्थानीय इकाइयों को भंग कर जिला अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया है. अब संगठन का नए सिरे से गठन होगा.

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Kanhaiya Kumar Jha

भोपाल: दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठन स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए पूरे जिला संगठन को भंग कर दिया है. पार्टी ने जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह को पद से हटाने के साथ सभी स्थानीय इकाइयों को भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है. उपचुनाव के नतीजों के बाद संगठन की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रदर्शन को लेकर पार्टी ने यह सख्त कदम उठाया है. अब दतिया में बीजेपी संगठन का पुनर्गठन किया जाएगा.

उपचुनाव के परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद बीजेपी नेतृत्व ने दतिया जिले की पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग करने का निर्णय लिया. इसके साथ जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह को भी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया. पार्टी ने केवल जिला कार्यकारिणी ही नहीं, बल्कि सभी स्थानीय इकाइयों को भी समाप्त कर दिया है. अब संगठन को नई टीम के साथ दोबारा खड़ा करने की तैयारी होगी.

उपचुनाव में कांग्रेस ने दर्ज की जीत

दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों के अंतर से हराया. यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद कराया गया था. परिणाम ने इस सीट पर राजनीतिक समीकरण बदल दिए और बीजेपी के लिए आत्ममंथन की स्थिति पैदा कर दी.


अपने मजबूत बूथ पर भी पिछड़ी बीजेपी

उपचुनाव के बाद सबसे अधिक चर्चा बूथ नंबर 121 की रही. यह बूथ बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा से जुड़ा माना जाता है. यहां कांग्रेस को 291 वोट मिले, जबकि बीजेपी 264 वोटों पर सिमट गई. अपने प्रभाव वाले बूथ पर पिछड़ना पार्टी के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है और इसी वजह से संगठन की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं.

भीतरघात की चर्चाओं ने बढ़ाई चिंता

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और भीतरघात की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं. कई राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि अपेक्षित स्तर पर कार्यकर्ताओं का समन्वय नहीं बन सका. हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन संगठन में बड़े बदलाव को इन चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है.

नए संगठन पर रहेगी सबकी नजर

जिला संगठन भंग होने के बाद अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत और सक्रिय टीम तैयार करने की होगी. नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और संगठन के पुनर्गठन पर आने वाले दिनों में फैसला लिया जाएगा. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी इस बदलाव के जरिए कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करने और भविष्य की चुनावी तैयारियों को मजबूत करने की कोशिश करेगी.