रेप पीड़िताओं को मिलेगा न्याय! झारखंड हाईकोर्ट का सख्त आदेश, 2 महीने में पूरी होगी जांच

झारखंड में रेप के मामलों की जांच अब दो महीने में पूरी होगी. हाई कोर्ट ने जीरो एफआईआर, मुआवजा और पीड़ितों की सुरक्षा को लेकर सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं.

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Meenu Singh

झारखंड: झारखंड हाई कोर्ट ने यौन उत्पीड़न की पीड़ित महिलाओं को तेज न्याय दिलाने के लिए एक बेहद अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा है कि झारखंड में रेप के मामलों की जांच अब दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी. हाई कोर्ट ने पुलिस, अस्पताल और सरकार तीनों को अलग-अलग कड़े निर्देश दिए हैं ताकि पीड़िता को समय पर न्याय और सुरक्षा मिल सके.

किसने और कैसे दिया यह फैसला?

हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह आदेश जारी किया. अदालत ने उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और दंडनीय कार्यवाही का आदेश दिया जो इन नियमों का पालन नहीं करेंगे. यह फैसला झारखंड में यौन अपराध के मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

तुरंत दर्ज करनी होगी जीरो FIR

अदालत ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिया है कि यौन अपराध की सूचना मिलते ही तुरंत जीरो FIR दर्ज की जाए. चाहे वह घटना किसी भी इलाके या पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. 


यह नियम इसलिए जरूरी है क्योंकि अक्सर पुलिस अधिकार क्षेत्र का बहाना बनाकर शिकायत दर्ज करने में देरी करती है, जिससे पीड़िता को न्याय मिलने में रुकावट आती है.

पंद्रह दिन में प्रारंभिक जांच, दो महीने में पूरी जांच

हाई कोर्ट ने कहा है कि दुष्कर्म के मामलों में शुरुआती जांच पंद्रह दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए. पूरी जांच के लिए पुलिस को अधिकतम दो महीने का समय दिया गया है. 

अदालत ने यह भी कहा कि देरी होने पर मेडिकल सबूत नष्ट हो जाते हैं जिससे मुकदमा कमजोर पड़ जाता है. इसके अलावा आरोपनामा दाखिल होने के दो महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई भी बिना अनावश्यक स्थगन के पूरी की जानी चाहिए.

टू-फिंगर जांच पर पूरी तरह रोक

अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में टू-फिंगर जांच पर पूरी तरह रोक रहेगी. राज्य सरकार को सभी अस्पतालों को इस बारे में परिपत्र जारी करने का निर्देश दिया गया है. जो डॉक्टर इस आदेश की अवहेलना करेंगे उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

पीड़िता के बच्चों को मिलेगी मुफ्त शिक्षा

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि दुष्कर्म की घटना से जन्मे बच्चों को बारहवीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा दी जाए. इसके लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं. इसके अलावा ऐसे होनहार विद्यार्थियों के लिए सरकारी स्कॉलरशिप का भी प्रावधान हो जो देश के बड़े केंद्रीय संस्थानों में दाखिला लेते हैं.

वन-स्टॉप सेंटरों की हालत सुधारने का आदेश

अदालत ने कई जिलों के वन-स्टॉप सेंटरों की खराब हालत पर गहरी चिंता जताई. इन केंद्रों में साफ पानी, रसोई और सुरक्षा की बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं. अदालत ने सरकार को खाली पड़े पदों को भरने, परिसर में CCTV लगाने और साफ पेयजल की व्यवस्था करने का आदेश दिया.

तीस दिन में मिलेगा मुआवजा, पहचान रहेगी गोपनीय

हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि अदालत के आदेश के तीस दिनों के भीतर पीड़िता को अंतरिम मुआवजा दिया जाए. साथ ही पीड़िता की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है ताकि उसे सामाजिक कलंक का सामना न करना पड़े.