रंजिश की आग में जल गया पूरा परिवार, तुगलकाबाद अग्निकांड में 17 साल की लड़की निकली मास्टरमाइंड
दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में पैसों के विवाद के चलते एक स्कूटर में आग लगाई गई, जो रिहायशी इमारत में फैल गई. इस हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई और पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन इलाके में शुक्रवार तड़के एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. रात करीब ढाई बजे एक रिहायशी इमारत की पार्किंग में खड़े स्कूटर में आग लगा दी गई, जो देखते-देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले गई. आग और धमाके की वजह से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई. रविवार को पुलिस ने इस साजिश के पीछे चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक 17 साल की नाबालिग लड़की भी शामिल है.
शुक्रवार की सुबह जब अधिकांश लोग नींद में थे, तब तुगलकाबाद एक्सटेंशन की एक इमारत में रहने वाले परिवार पर कहर टूट पड़ा. 70 वर्षीय सुशीला देवी, उनके 28 वर्षीय पोते पंकज पांडे और 20 वर्षीय पोती सोनी की इस आग में जलकर मौत हो गई. परिवार की दो अन्य सदस्य, 50 वर्षीय गुड्डी देवी और 18 वर्षीय मणि गंभीर रूप से घायल हुईं, हालांकि अब वे खतरे से बाहर बताई जा रही हैं.
नाबालिग लड़की का चेहरा CCTV में कैद
पुलिस को जांच में CCTV फुटेज से अहम सुराग मिला. फुटेज में एक नाबालिग लड़की दुपट्टे से अपना चेहरा ढककर इमारत में दाखिल होती दिखी और कुछ ही मिनटों बाद तेज़ी से बाहर निकल गई. धमाका इसके तुरंत बाद हुआ. पुलिस ने इस 17 साल की लड़की समेत तीन अन्य आरोपियों को रविवार को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी.
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पैसों के झगड़े ने ली तीन जानें
पूछताछ में सामने आया कि यह सब एक निजी रंजिश और पैसों के विवाद का नतीजा था. DCP ने बताया कि गोविंदपुरी के नवजीवन कैंप में रहने वाले 33 वर्षीय निरंजन और उसके 27 वर्षीय भाई राजकुमार ने यह साजिश रची थी. बदला लेने के मकसद से उन्होंने नाबालिग लड़की और उसकी मां सरिता को इस काम के लिए तैयार किया. एक छोटे से झगड़े की परिणति तीन निर्दोष लोगों की जान लेने में हुई.
धाराएं जोड़ी गईं, कानूनी शिकंजा कसा
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराएं लगाई हैं. इनमें धारा 61 (आपराधिक साजिश), 105 (गैर-इरादतन हत्या), 110 (हत्या की कोशिश), 326(g) (आग से नुकसान) और 331(4) (रात में घर में घुसना) शामिल हैं. गोविंदपुरी थाने में दर्ज FIR में सभी आरोपियों के नाम दर्ज कर लिए गए हैं और आगे की जांच जारी है.
इमारत में सुरक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं था
इस हादसे ने दिल्ली की घनी आबादी वाली बस्तियों में इमारत सुरक्षा की खामियां एक बार फिर उजागर कर दी हैं. करीब 100 वर्ग गज के प्लॉट पर बनी इस पांच मंजिला इमारत में दस फ्लैट थे, लेकिन न कोई फायर एग्जिट था, न वेंटिलेशन, और न ही आग बुझाने के उपकरण. ग्राउंड फ्लोर की पार्किंग में सात दोपहिया वाहन खड़े थे. जब स्कूटर में आग लगी तो धुआं पूरी इमारत में भर गया और ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले लोग बाहर निकलने में असमर्थ रहे.