राखी की डोर में बंधी इंसानियत, 32 साल से एक मुस्लिम परिवार दे रहा एकता का संदेश; कहानी जानकर कहेंगे यही है असली भारत

रायपुर का मुस्लिम परिवार 32 साल से राखी बना रहा है. रक्षाबंधन पर परिवार हिंदू मुस्लिम एकता और भाईचारे का संदेश देता है, जिसे लोग खूब पसंद करते हैं.

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Reepu Kumari

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक मुस्लिम परिवार पिछले 32 वर्षों से राखी बनाने और बेचने का काम कर रहा है. दानिश आलम और उनका परिवार रक्षाबंधन से कई महीने पहले राखियां तैयार करने में जुट जाता है. उनके लिए राखी कारोबार का जरिया होने के साथ रिश्तों और भाईचारे की निशानी भी है. परिवार का मानना है कि यह त्योहार लोगों को धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर एक दूसरे के करीब लाता है और समाज में मेलजोल, प्रेम, सद्भाव और एकता की भावना मजबूत करता है.

हर साल खास तैयारी

रायपुर का यह परिवार रक्षाबंधन को लेकर हर साल खास तैयारी करता है. दानिश आलम अपनी मां, भाइयों और भाभियों के साथ मिलकर घर पर राखियां तैयार करते हैं और दुकान के साथ सालाना स्टॉल भी लगाते हैं. उनके पिता ने करीब तीन दशक पहले इस काम की शुरुआत की थी. समय के साथ यह छोटा कारोबार परिवार की पहचान बन गया. दानिश बताते हैं कि बचपन से ही वह राखियां बनाते आ रहे हैं और अब परिवार की कई पीढ़ियां इस काम से जुड़ी हैं.

पिता से मिली जिम्मेदारी

खबर एजेंसी दानिश आलम के मुताबिक, उनके पिता ने राखी बनाने का काम शुरू किया था. वह छोटी उम्र से ही इस काम में उनका हाथ बंटाते रहे हैं. करीब 32 साल बाद भी परिवार ने इस परंपरा को जारी रखा है. दानिश घर पर राखियां बनाने के साथ अपनी दुकान भी चलाते हैं. रक्षाबंधन से करीब चार महीने पहले परिवार की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. घर के सदस्य मिलकर राखियां बनाते हैं और फिर उन्हें बेचने की जिम्मेदारी भी संभालते हैं.


छह से सात बहनों से जुड़ा है खास रिश्ता

दानिश ने बताया कि उनकी छह से सात बहनें हैं, जिनमें दूसरे समुदायों से जुड़ी बहनें भी शामिल हैं. हर साल रक्षाबंधन पर उनकी बहनें उन्हें राखी बांधती हैं. इसके बाद वे भाई से प्यार से अपना उपहार भी मांगती हैं. दानिश का कहना है कि उनके लिए इस रिश्ते की खूबसूरती धर्म से बड़ी है. वह खुद को पहले भारतीय मानते हैं और हर त्योहार को खुशी के साथ मनाने में विश्वास रखते हैं.

पत्नी निगार ने कहा, त्योहार सबके लिए है

दानिश की पत्नी निगार आलम भी रक्षाबंधन को सभी लोगों का त्योहार मानती हैं. उनका कहना है कि केवल हिंदू ही इस त्योहार को मनाएं, ऐसा जरूरी नहीं है. उनके मुताबिक, सभी समुदायों के लोगों को मिलकर रक्षाबंधन मनाना चाहिए, क्योंकि यह त्योहार भाई बहन के बीच गहरे प्रेम और अपनापन दर्शाता है. निगार खुद भी अपने भाइयों को राखी बांधती हैं, जिनमें दूसरे धर्मों से जुड़े भाई भी शामिल हैं.

मां के लिए भी खुशी का मौका

दानिश की मां अंजुम आलम ने बताया कि पूरा परिवार रक्षाबंधन को बेहद खुशी और उत्साह के साथ मनाता है. घर में राखियां बनाने की तैयारियां कई महीने पहले शुरू हो जाती हैं. परिवार के सभी सदस्य अपनी क्षमता के अनुसार काम में योगदान देते हैं. कोई राखियां तैयार करता है तो कोई उन्हें दुकान और स्टॉल पर बेचता है. इस तरह कारोबार के साथ त्योहार परिवार के लिए आपसी रिश्तों और खुशियों को साझा करने का अवसर भी बन जाता है.

32 साल की कहानी दे रही भाईचारे का संदेश

दानिश का परिवार मानता है कि त्योहारों को धर्म के आधार पर अलग अलग देखने के बजाय उन्हें मिलजुलकर मनाना चाहिए. उनका 32 साल पुराना राखी कारोबार इसी सोच की मिसाल बन गया है. परिवार का कहना है कि संकीर्ण सोच रखने वाले लोग ही त्योहारों को हिंदू मुस्लिम के नजरिए से देखते हैं. उनके लिए राखी प्रेम, भाईचारे और रिश्तों की डोर है. रायपुर का यह परिवार अपने काम के जरिए सामाजिक सद्भाव और आपसी एकता का संदेश दे रहा है.