छत्तीसगढ़ में नक्सल नीति पर बड़ा फैसला, कम गंभीर मामलों के कैदियों को मिल सकती है राहत

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सली गतिविधियों से जुड़े कम गंभीर मामलों में जेल में बंद कैदियों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने ऐसे मामलों की कानूनी समीक्षा कर मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं.

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Shanu Sharma

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सली गतिविधियों से जुड़े ऐसे मामलों की समीक्षा कराने का फैसला किया है जिनमें किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है और जिनकी प्रकृति कम गंभीर मानी जाती है. सरकार का कहना है कि इन मामलों की कानूनी जांच के बाद यदि मामला उपयुक्त पाया जाता है तो मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. 

सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में कानून का पालन सर्वोपरि रहेगा और प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जाएगी. हिंसा, हत्या या जनहानि से जुड़े मामलों को इस निर्णय के दायरे से बाहर रखा गया है.

सरकारी वकीलों और अभियोजकों की बनेगी विशेष टीम

इस संबंध में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि विधि विभाग के सहयोग से सरकारी वकीलों और अभियोजन अधिकारियों की एक विशेष टीम बनाई जाए. यह टीम प्रत्येक मामले की कानूनी स्थिति का अध्ययन करेगी और जिन मामलों में कानूनी आधार मौजूद होगा, उनमें मुकदमे वापस लेने की सिफारिश करेगी. सरकार ने यह भी तय किया है कि इस प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में प्रत्येक सप्ताह की जाएगी, ताकि निर्णय में अनावश्यक देरी न हो.


विकास के लिए मिलेगा एक करोड़

राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास को नई गति देने के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की है. जिन गांवों ने स्वयं को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया है, उन्हें विकास कार्यों के लिए एक करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी. फिलहाल ऐसे 50 गांवों की पहचान की गई है. इनमें सुकमा और बीजापुर जिले के 20-20 गांव तथा नारायणपुर जिले के 10 गांव शामिल हैं.

सरकार का मानना है कि विकास योजनाओं के जरिए इन इलाकों में स्थायी शांति और बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित किया जा सकेगा. समीक्षा बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी 15 अगस्त के अवसर पर सभी नक्सल मुक्त गांवों में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जाए. सरकार का उद्देश्य इन गांवों में राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास के संदेश को मजबूत करना है.