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छत्तीसगढ़ में सिमटा नक्सल का प्रभाव, भारत सरकार ने जारी की सूची; इन चार जिलों में बड़े ऑपरेशन की तैयारी

भारत सरकार की नई लिस्ट में देश के सिर्फ छह नक्सल प्रभावित जिले बचे हैं, जिनमें से चार छत्तीसगढ़ में हैं. सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर और गरियाबंद में बड़े ऑपरेशन की तैयारी है.

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Km Jaya

रायपुर: भारत सरकार ने नक्सल प्रभावित जिलों की लिस्ट जारी की है. छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन में अब सिर्फ तीन जिले नक्सल प्रभावित हैं. छत्तीसगढ़ का गरियाबंद जिला भी लिस्ट में शामिल है. बाकी डिवीजन के पांच जिलों को नक्सल-मुक्त घोषित कर दिया गया है. इससे सिर्फ छह जिले बचे हैं.

बस्तर डिवीजन के सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर को नक्सल प्रभावित जिले घोषित किया गया है. गरियाबंद के साथ-साथ दो और राज्यों के दो जिलों को भी नक्सल प्रभावित घोषित किया गया है. इसलिए भारत सरकार अब छत्तीसगढ़ के चार जिलों समेत सभी छह नक्सल प्रभावित जिलों में एक बड़ा और आखिरी ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी कर रही है. बस्तर के IG सुंदर राज पी. ने बताया कि भारत सरकार समय-समय पर नक्सल प्रभावित जिलों की लिस्ट जारी करती है. 

लेटेस्ट लिस्ट में में कितने जिले हैं शामिल?

लेटेस्ट लिस्ट में भारत सरकार ने छह जिलों की पहचान की है. इन जिलों में फोकस्ड एक्शन चल रहा है. बाकी बचे जिलों में भी रेगुलर ऑपरेशन और सिक्योरिटी ड्रिल चल रही हैं, जिन्हें नक्सल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है. इस बीच छत्तीसगढ़ के सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर और गरियाबंद में सिक्योरिटी फोर्स हाई अलर्ट पर हैं और लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. 

छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को जल्द ही नक्सल-फ्री घोषित कर दिया जाएगा. सभी सिक्योरिटी एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है.

नक्सलियों का बनाया मेमोरियल हुआ ध्वस्त

बता दें कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ सिक्योरिटी फोर्स का ऑपरेशन तेजी से जारी है. दर्जनों नक्सली मारे जा चुके हैं और बड़ी संख्या में हथियारों के साथ सरेंडर कर रहे हैं. इसके अलावा जवान अब नक्सलियों के पिलर और सिंबॉलिक स्मारकों को गिराने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसी सिलसिले में CRPF के जवानों ने 1998 में सुकमा के बुरकलंका में नक्सलियों का बनाया एक मेमोरियल गिरा दिया था. यह साउथ बस्तर का सबसे बड़ा 28 साल पुराना मेमोरियल था.

कितने नक्सली मारे गए थे?

सुकमा जिले में यह ऑपरेशन सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की 50वीं बटालियन के जवानों ने कमांडेंट प्रेमजीत कुमार के डायरेक्शन में किया था. मिली जानकारी के मुताबिक यह स्मारक दक्षिण बस्तर इलाके का सबसे बड़ा नक्सली स्मारक था, जिसे संगठन हमेशा अपनी ताकत और असर के निशान के तौर पर इस्तेमाल करता था. 3 जनवरी, 2026 को सुरक्षा बलों ने इसी इलाके में 12 नक्सलियों को मार गिराया था. तब से सुरक्षा बल इस इलाके में लगातार छापेमारी कर रहे हैं.