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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश सरकार का बड़ा दांव, उच्च जाति विकास आयोग का गठन

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने इस आयोग के गठन का उद्देश्य अगड़ी जातियों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास को सुनिश्चित करना बताया है. बिहार में अगड़ी जातियां, जिनमें भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ जैसी जातियां शामिल हैं, जिसकी जनसंख्या का लगभग 20% हिस्सा हैं.

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Gyanendra Sharma

बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक कदम उठाया है. उन्होंने राज्य में अगड़ी जातियों के विकास के लिए 'उच्च जाति आयोग' के गठन की घोषणा की है. इस आयोग के अध्यक्ष के रूप में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता महाचंद्र प्रसाद सिंह को नियुक्त किया गया है, जबकि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता राजीव रंजन प्रसाद को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आयोग में दयानंद राय, जय कृष्ण झा और राजकुमार सिंह को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. इस आयोग का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया है. 

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने इस आयोग के गठन का उद्देश्य अगड़ी जातियों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास को सुनिश्चित करना बताया है. बिहार में अगड़ी जातियां, जिनमें भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ जैसी जातियां शामिल हैं, जिसकी जनसंख्या का लगभग 20% हिस्सा हैं. यह आयोग इन समुदायों की समस्याओं का अध्ययन करेगा और उनके कल्याण के लिए नीतियां बनाने में सरकार की मदद करेगा. इसके अलावा, यह आयोग सामाजिक समानता को बढ़ावा देने और अगड़ी जातियों के बीच विकास के अवसरों को सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगा.

इस कदम को बिहार की जटिल जातिगत समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है. नीतीश कुमार लंबे समय से अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और महादलित समुदायों के विकास पर जोर देते रहे हैं, लेकिन इस बार अगड़ी जातियों के लिए अलग से आयोग का गठन कर उन्होंने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश की है. यह कदम राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक अगड़ी जातियों में मजबूत रहा है.

रणनीतिक कदम और राजनीतिक मायने

बिहार विधानसभा चुनाव 2025, जो अक्टूबर या नवंबर में होने की संभावना है से पहले इस आयोग का गठन एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है. नीतीश कुमार और बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. हाल के लोकसभा चुनावों में एनडीए ने बिहार में 40 में से 30 सीटें जीती थीं.