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Bihar Elections 2025: बिहार चुनाव में 35 साल से किस सीट के लिए बैचेन है कांग्रेस, क्या इस बार चमकेगी किस्मत?

Bihar Chunav: कांग्रेस पार्टी, जो देश की सबसे पुरानी और बड़ी राजनीतिक ताकत रही है, बिहार समेत कई राज्यों में प्रभावी रही है, लेकिन बांका जिले में उसका हाल खराब रहा है. लालू यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से कांग्रेस यहां तीन दशकों से कोई विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है.

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Princy Sharma

Bihar Elections 2025: कांग्रेस पार्टी , जो देश की सबसे पुरानी और बड़ी राजनीतिक पार्टी है , ने हमेशा ही बिहार समेत कई राज्यों में अपना मजबूत दबदबा कायम रखा है. लेकिन बांका जिले में कांग्रेस का हाल बहुत खराब रहा है. यह पार्टी यहां पिछले तीन दशकों से एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत पाई है. खासकर लालू यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद कांग्रेस की जड़ें बांका में उखड़ गईं और इसके बाद हुए आठ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना ही करना पड़ा. 

कांग्रेस की आखिरी बड़ी जीत 1985 में हुई थी , जब पार्टी ने बांका की सभी पांच सीटों पर कब्जा किया था. उस समय बांका , भागलपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था. 1985 से पहले भी कांग्रेस का बांका जिले में शानदार प्रदर्शन रहा था. लेकिन 1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का विजय रथ रुक गया. इस चुनाव में कांग्रेस के तीन बड़े नेता अमरपुर , धोरैया और बांका की सीटें हार गईं और इसके बाद से कांग्रेस को बांका में कभी कोई बड़ी जीत नहीं मिली. 

2010 और 2020 में फिर आजमाई थी किस्मत

2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर से सभी पांच सीटों पर प्रत्याशी उतारे , लेकिन इसका परिणाम बुरा ही रहा. कांग्रेस के सभी प्रत्याशी चुनाव हार गए और उनकी जमानत तक जब्त हो गई. इसके बाद भी कांग्रेस ने हार मानने का नाम नहीं लिया और 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद से गठबंधन के बाद एक बार फिर से अपनी किस्‍मत आजमाई. इस बार अमरपुर से जितेंद्र सिंह को मैदान में उतारा गया. हालांकि , वह भी हार गए , लेकिन इस चुनाव में उन्हें 50 हजार वोट मिले थे , जबकि JDU को जयंत राज ने 53 हजार वोट लेकर जीत हासिल की. 

क्या इस बार बांका जिले में सीट जीत पाएगी कांग्रेस?

अब 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस अपनी पूरी ताकत लगा रही है. कंचना कुमारी सिंह , कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस के लिए 35 साल बाद बांका जिले में सीट जीतने का यह सबसे बड़ा मौका हो सकता है. खासकर अमरपुर सीट पर कांग्रेस का दावा मजबूत है , क्योंकि पिछले चुनाव में केवल 3 हजार वोट से हार हुई थी. पार्टी इस बार अपनी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी और हर सीट पर मजबूत लड़ाई लड़ेगी.