Bihar Assembly Election 2025: 'दो EPIC नंबर दिए तो गलती किसकी', RJD नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग से 'जंग' का किया ऐलान
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दो ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) नंबर जारी होने के मामले में जवाबदेही की मांग की है.
Bihar Assembly Election 2025: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दो ईपीआईसी (मतदाता पहचान पत्र) नंबर जारी होने के मामले में जवाबदेही की मांग की है. इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए तेजस्वी ने मीडिया से कहा, "अगर दो ईपीआईसी नंबर जारी किए गए थे, तो इसमें गलती किसकी है? और वे मुझसे स्पष्टीकरण मांग रहे हैं." उन्होंने साफ किया कि उन्हें चुनाव आयोग से नहीं, बल्कि पटना के रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट से नोटिस मिला है. तेजस्वी ने कहा, "उन्हें चुनाव आयोग से नहीं, बल्कि पटना रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट से कोई नोटिस मिला है और वो इसका सही जवाब देंगे ."
पटना के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने तेजस्वी यादव से उस ईपीआईसी कार्ड का विवरण जमा करने को कहा है, जिसका जिक्र उन्होंने 2 अगस्त को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था. नोटिस में 8 अगस्त की दोपहर तक सभी डॉक्युमेंट्स और ईपीआईसी कार्ड की कॉपी जमा करने का अनुरोध किया गया है. पत्र में लिखा गया, 'आपके द्वारा दिनांक 02.08.2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई ईपीआईसी कार्ड का विवरण गहन जांच के लिए मांगा गया था, लेकिन अब तक आपके स्तर से वांछित डॉक्युमेंट्स और ईपीआईसी कार्ड की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई है.अपने दोबारा अनुरोध है कि 08.08.2025 के दोपहर तक विवरण संबंधित अधिकारी को उपलब्ध करा दिया जाए, ताकि इसकी जांच की जा सके."
तेजस्वी के दावे और चुनाव आयोग का खंडन
तेजस्वी यादव ने शुरू में दावा किया था कि 1 अगस्त को जारी नई वोटर लिस्ट ड्राफ्ट में उनका नाम शामिल नहीं है. इसके बाद, उन्होंने आरोप लगाया कि उनका ईपीआईसी नंबर बदल दिया गया है. हालांकि, चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन करते हुए साफ़ किया कि गहन जांच के बाद पुष्टि हुई है कि तेजस्वी का नाम बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के पुस्तकालय भवन स्थित मतदान केंद्र संख्या 204 के क्रमांक 416 पर मौजूद है.
विवाद से गहराया राजनीतिक माहौल
मामला अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. तेजस्वी के बयानों ने न केवल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि मतदाता सूची और ईपीआईसी नंबर से जुड़े प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी बहस छेड़ दी है. राजद समर्थकों का कहना है कि यह मामला तेजस्वी को बदनाम करने की साजिश हो सकता है, जबकि विपक्षी दल इसे प्रशासनिक चूक मान रहे हैं. बता दें इस साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने को हैं. इससे पहले ये विवाद काफी गहराता हुआ नजर आ रहा है.