'नागरिकता का सबूत नहीं आधार, पहचान के लिए मान्य', सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पर चुनाव आयोग ने क्यों कही ये बात?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड को नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता. 

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Kuldeep Sharma

Aadhaar Not Proof Of Citizenship: बिहार में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद अब यह सवाल उठ रहा था कि क्या राष्ट्रीय स्तर पर भी मतदाता सूची संशोधन (SIR) में आधार कार्ड को मान्यता दी जाएगी. इस पर चुनाव आयोग ने स्थिति साफ कर दी है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को कहा कि आधार कार्ड सिर्फ 'पहचान का प्रमाण' है, इसे न तो नागरिकता और न ही निवास का सबूत माना जा सकता है.

पटना में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आधार कार्ड को Representation of the People Act 1950 और Aadhaar Act के तहत नागरिकता का सबूत नहीं माना जा सकता. उन्होंने बताया, 'सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आधार कार्ड को जन्मतिथि, निवास या नागरिकता के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जा सकता. यह केवल पहचान प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है.'

आधार नंबर देना वैकल्पिक

कुमार ने आगे कहा कि वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करने के लिए आधार नंबर देना पूरी तरह वैकल्पिक है. उन्होंने कहा 'आधार देना न तो Representation of the People Act की धारा 26 के तहत अनिवार्य है और न ही Aadhaar Act के तहत. यह पूरी तरह धारक की इच्छा पर निर्भर करता है.'

सुप्रीम कोर्ट ने भी दी थी सीमित अनुमति

8 सितंबर को जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाला बागची की पीठ ने बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) के दौरान आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि आधार व्यक्ति की पहचान बताता है, लेकिन नागरिकता नहीं. पहले मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 11 दस्तावेजों में से किसी एक को देना जरूरी था.

राजद (RJD) और अन्य याचिकाकर्ताओं ने यह दलील दी थी कि चुनाव आयोग आधार को स्वतंत्र दस्तावेज के रूप में नहीं मान रहा, बल्कि 11 तय दस्तावेजों में से किसी एक की मांग कर रहा था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'आधार पहचान का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं.'

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन कर रहा है. कुमार ने बताया, 'हमने हमेशा से आधार को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया है, और आगे भी करेंगे. लेकिन यह नागरिकता साबित नहीं कर सकता. अगर किसी ने 2023 के बाद आधार कार्ड लिया या डाउनलोड किया है, तो उस पर भी लिखा होता है कि यह जन्मतिथि या नागरिकता का सबूत नहीं है.'

उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए नागरिकता साबित करनी है, तो अन्य दस्तावेजों की आवश्यकता होगी. उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा- 'आधार एक तकनीकी दस्तावेज है, नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं.'

राष्ट्रीय स्तर पर भी रहेगा यही नियम

बिहार में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह नियम राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू रहेगा. चुनाव आयोग ने साफ किया है कि आने वाले राष्ट्रीय विशेष मतदाता सूची संशोधन अभियान (National SIR) में भी आधार केवल पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा. आयोग ने यह भी दोहराया कि नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाणपत्र या अन्य वैध दस्तावेज जरूरी होंगे.