वेदा कृष्णमूर्ति ने लिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास, मिडिल आर्डर में खेलती थीं भारतीय महिला क्रिकेटर
भारतीय महिला क्रिकेट की दिग्गज बल्लेबाज वेदा कृष्णमूर्ति ने शुक्रवार को अपने फैंस को एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पेशेवर क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की. इ
Veda Krishnamurthy retirement: भारतीय महिला क्रिकेट की दिग्गज बल्लेबाज वेदा कृष्णमूर्ति ने शुक्रवार को अपने फैंस को एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पेशेवर क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की. इस खबर ने क्रिकेट प्रेमियों के बीच एक युग के समापन की भावना जगा दी है. वेदा ने अपने शानदार करियर में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में कुल 124 मैच खेले और कई यादगार प्रदर्शन किए.
वेदा कृष्णमूर्ति ने भारतीय महिला क्रिकेट में अपनी पहचान एक आक्रामक और तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज के रूप में बनाई. उन्होंने 48 वनडे मैचों में 25.90 की औसत से 829 रन बनाए, जिसमें कई महत्वपूर्ण पारियां शामिल हैं. इसके अलावा, टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने 76 मैचों में 18.61 की औसत से 875 रन जोड़े. उनकी बल्लेबाजी में गति, संयम और आक्रामकता का शानदार मिश्रण देखने को मिला, जो उन्हें भारतीय मध्यक्रम की रीढ़ बनाता था.
टी20 विश्व कप 2020: आखिरी अंतरराष्ट्रीय पारी
वेदा की भारतीय जर्सी में आखिरी उपस्थिति 2020 टी20 विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ थी. इस मैच में उन्होंने 19 रनों की उपयोगी पारी खेली, लेकिन भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा. "उस फाइनल में खेलना मेरे लिए गर्व का क्षण था, भले ही नतीजा हमारे पक्ष में न रहा," वेदा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा. इस पारी ने उनके करियर की एक महत्वपूर्ण छवि को उजागर किया, जहां उन्होंने दबाव में भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया.
डब्ल्यूपीएल में योगदान
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा, वेदा ने महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) में भी अपनी छाप छोड़ी. उन्होंने कर्नाटक और गुजरात जायंट्स के लिए खेलते हुए कई शानदार प्रदर्शन किए. उनकी नेतृत्व क्षमता और अनुभव ने युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम किया. "मैंने हमेशा मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की, चाहे वह राष्ट्रीय टीम हो या डब्ल्यूपीएल," वेदा ने अपने बयान में कहा.
भविष्य की योजनाएं
संन्यास की घोषणा के साथ, वेदा ने संकेत दिया कि वह क्रिकेट से पूरी तरह दूर नहीं होंगी. वह कोचिंग और मेंटरशिप के जरिए खेल के विकास में योगदान देना चाहती हैं. उनके इस फैसले ने प्रशंसकों को यह उम्मीद दी है कि वह भविष्य में भी क्रिकेट से जुड़ी रहेंगी.