भाईयों को राखी क्यों बांधती हैं बहनें? भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा से जानें इस पवित्र धागे का महत्व

रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रेम, विश्वास, रक्षा और त्याग से जुडी कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं भी प्रचलित हैं. श्री कृष्ण-द्रौपदी से लेकर इंद्रदेव और राजा बलि तक की कथाएं इस पर्व के धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं.

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Shanu Sharma

रक्षाबंधन से जुडी सबसे लोकप्रिय कथाओं में भगवान श्री कृष्ण और द्रौपदी की कहानी प्रमुख है. मान्यता है कि एक बार श्री कृष्ण के हाथ में चोट लग गई और उससे खून बहने लगा. यह देखकर द्रौपदी व्याकुल हो गईं. उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का एक हिस्सा फाड़कर कृष्ण की कलाई पर बांध दिया. इससे खून बहना रुक गया.

कहा जाता है कि बाद में जब कौरव सभा में द्रौपदी का चीरहरण करने का प्रयास किया गया, तब श्री कृष्ण ने उनकी लाज बचाई. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह उसी रक्षा भावना का प्रतिफल था. इसी कथा को भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.

पन्ना की राखी ने बदला युद्ध का रुख

इतिहास में भी राखी को सम्मान और रिश्ते का प्रतीक माना गया है. पन्ना की राखी की कथा के अनुसार, राजस्थान की दो रियासतों के बीच संघर्ष चल रहा था. इसी दौरान एक रियासत पर मुगलों ने हमला कर दिया. दूसरी रियासत का शासक मुगलों की मदद के लिए आगे बढ रहा था. पन्ना ने उसे राखी भेजकर भाई का रिश्ता कायम किया. राखी मिलने के बाद उसने अपना पक्ष बदल लिया और मुगलों के खिलाफ युद्ध किया. इस तरह राखी ने दो पक्षों के बीच दुश्मनी को मित्रता में बदलने का काम किया.


रानी कर्णावती और हुमायूं की कथा

मध्यकालीन इतिहास से जुडी एक प्रसिद्ध कथा रानी कर्णावती और मुगल बादशाह हुमायूं की है. कहा जाता है कि चित्तौड की रानी कर्णावती ने हुमायूं को अपना भाई मानकर राखी भेजी थी. हुमायूं ने इस रिश्ते को स्वीकार किया और रानी के सम्मान की रक्षा के लिए सहायता का कदम उठाया. यह कथा बताती है कि राखी का रिश्ता धर्म और जाति की सीमाओं से ऊपर मानवता और सम्मान से जुडा रहा है.

इंद्रदेव की विजय से जुडी मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध हुआ. असुरों ने इंद्र सहित देवताओं को पराजित कर दिया. संकट की स्थिति में इंद्र ने गुरु बृहस्पति से उपाय पूछा. इसके बाद श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्राणी ने विधि-विधान से रक्षा सूत्र तैयार करवाकर इंद्र की कलाई पर बांधा.मान्यता है कि रक्षा सूत्र के प्रभाव से इंद्र को युद्ध में विजय मिली. इसी कथा को भी रक्षाबंधन पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा से जोडा जाता है.

माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा

एक अन्य मान्यता भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि से जुडी है. कहा जाता है कि राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनके साथ रहने लगे. इससे माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं. उन्होंने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई मान लिया. इसके बाद माता लक्ष्मी ने उपहार के रूप में भगवान विष्णु को मांग लिया. राजा बलि ने उनकी बात स्वीकार कर ली. मान्यता है कि यह घटना भी श्रावण पूर्णिमा के दिन हुई थी.