पुरुषों का साइलेंट किलर है यह कैंसर, बिना आहट बढ़ता है खतरा, 50 की उम्र के बाद ज्यादा जोखिम
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में तेजी से बढ़ती एक गंभीर बीमारी है, जिसे साइलेंट किलर कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण नजर नहीं आते. भारत में 50 साल के बाद पुरुषों में इसका खतरा तेजी से बढ़ता है.
नई दिल्ली: प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाला एक आम लेकिन खतरनाक कैंसर है. यह प्रोस्टेट ग्रंथि में शुरू होता है. प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि होती है जो स्पर्म बनाने में मदद करती है. इस बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती दौर में यह बिना किसी चेतावनी के बढ़ती रहती है. कई मामलों में पुरुषों को सालों तक कोई लक्षण महसूस नहीं होता. प्रोस्टेट कैंसर को साइलेंट किलर इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह शुरुआत में चुपचाप बढ़ता रहता है. जब तक इसके लक्षण साफ तौर पर सामने आते हैं. तब तक कई बार यह शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका होता है. यही वजह है कि समय पर जांच न होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है.
भारत में प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले कैंसरों में तीसरे स्थान पर है. इससे पहले फेफड़ों और मुंह का कैंसर आता है. हर साल दुनियाभर में करीब 15 लाख नए मामले सामने आते हैं. इंडियन जर्नल ऑफ यूरोलॉजी में प्रकाशित 2024 की एक स्टडी के अनुसार 50 साल की उम्र के बाद इसके मामलों में तेजी से बढ़ोतरी होती है. चिंता की बात यह है कि करीब 43 प्रतिशत मामलों में कैंसर का पता तब चलता है जब वह एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है.
क्यों भारत में कम है जागरूकता?
इतनी गंभीर बीमारी होने के बावजूद भारत में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता काफी कम है. इसका कारण यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं. रात में बार बार यूरिन आना या यूरिन की धार कमजोर होना जैसी समस्याओं को अधिकतर पुरुष उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर बड़ा खतरा बन जाती है.
शुरुआती स्टेज में क्यों नहीं दिखते लक्षण
मायो क्लिनिक के अनुसार प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती चरण में अक्सर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते. हालांकि कुछ संकेत ऐसे हो सकते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इनमें यूरिन या स्पर्म में खून आना. बार बार यूरिन लगना. यूरिन शुरू करने में परेशानी और रात में बार बार उठना शामिल है.
अगर कैंसर आगे बढ़ जाए तो इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं. इसमें यूरिन का रिसाव, पीठ या हड्डियों में लगातार दर्द, इरेक्शन में परेशानी, अत्यधिक थकान, बिना वजह वजन कम होना और हाथ पैरों में कमजोरी शामिल है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.
बीपीएच और प्रोस्टेट कैंसर में अंतर
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ अरुण कुमार गोयल के मुताबिक बढ़ती उम्र के साथ कई पुरुषों में बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया यानी बीपीएच की समस्या हो जाती है. इसमें यूरिन की धार कमजोर होना और ब्लैडर पूरी तरह खाली न होना जैसे लक्षण दिखते हैं. बीपीएच के लक्षण धीरे धीरे बढ़ते हैं जबकि प्रोस्टेट कैंसर में लक्षण तेजी से बिगड़ सकते हैं और इसके साथ खून आना और हड्डियों में दर्द जैसे संकेत भी दिखते हैं.
डॉक्टरों के अनुसार आमतौर पर 50 साल की उम्र के बाद प्रोस्टेट कैंसर की नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए. जिन पुरुषों के परिवार में पहले किसी को यह कैंसर रहा हो उन्हें 40 से 45 साल की उम्र से ही पीएसए टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन कराना चाहिए. समय पर जांच से कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है जहां इलाज की सफलता की संभावना काफी ज्यादा होती है.