क्यों 30 के बाद महिलाओं की हड्डियां तेजी से होने लगती हैं कमजोर? इन आसान टिप्स के साथ ऐसे बनाएं फौलादी
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के मौके पर जानिए महिलाओं में बढ़ती साइलेंट बोन लॉस की समस्या के बारे में. 30 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होने लगती हैं. सही खानपान और नियमित एक्सरसाइज से हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है.
नई दिल्ली: हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों, संघर्ष और उनके योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित होता है. अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं अपने परिवार की सेहत का तो पूरा ध्यान रखती हैं लेकिन अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं. यही वजह है कि कई स्वास्थ्य समस्याएं समय रहते सामने नहीं आ पातीं.
विशेषज्ञों के अनुसार 30 साल की उम्र के बाद कई महिलाओं में धीरे धीरे हड्डियों की मजबूती कम होने लगती है. इस स्थिति को साइलेंट बोन लॉस कहा जाता है जो आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है.
क्या है महिलाओं में साइलेंट बोन लॉस?
डॉक्टरों के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में हड्डियों की घनत्व धीरे धीरे कम होने लगती है. इस स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है. इसे साइलेंट बीमारी भी कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते. कई बार महिलाओं को इस समस्या के बारे में तब पता चलता है जब अचानक फ्रैक्चर हो जाता है या हड्डियां बहुत कमजोर हो जाती हैं. इसलिए समय रहते हड्डियों की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है.
30 की उम्र के बाद हड्डियां कमजोर होने के कारण
महिलाओं में 30 की उम्र के बाद शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं. इनमें सबसे अहम एस्ट्रोजन हार्मोन होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जब शरीर में इस हार्मोन का स्तर कम होने लगता है तो हड्डियों की मजबूती भी धीरे धीरे घटने लगती है. इसके अलावा कुछ लाइफस्टाइल से जुड़े कारण भी हड्डियों की कमजोरी को बढ़ा सकते हैं जैसे
- कैल्शियम और विटामिन डी की कमी
- लंबे समय तक बैठे रहना और कम शारीरिक गतिविधि
- धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन
- परिवार में हड्डियों की बीमारी का इतिहास
- बहुत कम बॉडी वेट
ये सभी कारण धीरे धीरे हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं.
समय रहते करवाएं हड्डियों की जांच
डॉक्टरों का कहना है कि यदि हड्डियों की स्थिति के बारे में सही जानकारी चाहिए तो समय समय पर जांच करवाना जरूरी है. DEXA स्कैन एक ऐसा टेस्ट है जिससे हड्डियों की घनत्व का पता लगाया जा सकता है. इस जांच से शुरुआती स्तर पर ही हड्डियों की कमजोरी का पता चल जाता है और समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है.
- कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार लें
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी बेहद जरूरी होते हैं. अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स और फोर्टिफाइड फूड शामिल करें.
- नियमित एक्सरसाइज करें
रोजाना हल्की एक्सरसाइज, वॉक, योग या जॉगिंग करने से हड्डियों की ताकत बढ़ती है. वेट बेयरिंग एक्सरसाइज भी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं.
- शराब और कैफीन का सेवन सीमित रखें
बहुत ज्यादा शराब और कैफीन लेने से शरीर में कैल्शियम के अवशोषण पर असर पड़ सकता है. इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर होता है.
- धूम्रपान से दूरी बनाएं
स्मोकिंग हड्डियों को धीरे धीरे कमजोर कर सकती है. इससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए धूम्रपान से दूर रहना जरूरी है.
- तनाव को कम रखें
लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी शरीर की सेहत पर असर डाल सकता है. योग, मेडिटेशन और माइंडफुलनेस जैसी आदतें अपनाकर तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है.