UPSC Prelims 2026 पेपर देख कैंडिडेट छोड़िए अधिकारियों का भी घूम गया माथा, जानिए सोशल मीडिया पर क्यों निकाल रहे लोग भड़ास

क्या UPSC प्रीलिम्स 2026 अब तक का सबसे कठिन पेपर था? सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे हैं. जानते हैं एक्सपर्ट ने क्या कहा है.

ANI (प्रतिकात्मक)
Reepu Kumari

Sarkari Naukri: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2026 की प्रारंभिक परीक्षा खत्म होने के बाद एक अलग ही मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है. परीक्षा खत्म होने के कुछ ही घंटों के भीतर, सोशल मीडिया पर इसे यूपीएससी इतिहास का सबसे कठिन पेपर बताने वाले दावों की बाढ़ आ गई.

कैंडिडेट ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम और रेडिट पर यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 के पेपर को लंबा और अप्रत्याशित बताया. यानि कुछ ऐसा जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. विभिन्न प्लेटफॉर्म पर की गई टिप्पणियों के विश्लेषण से पता चलता है कि मामला इससे कहीं अधिक जटिल है.

यूपीएससी की मेंटर ने क्या कहा?

यूपीएससी की मेंटर विरोनिका ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल पर कहा कि 'हर साल यही शोर होता है.' उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल भी जब सभी लोग कट-ऑफ बहुत कम होने की बात कर रहे थे, तब उनका विश्लेषण फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैली घबराहट से अलग था. उन्होंने अपने एक छात्र का स्क्रीनशॉट साझा किया जिसमें छात्र ने कहा था कि पेपर ठीक था, लेकिन अब सोशल मीडिया पर फैली घबराहट के कारण वह दुविधा में है.

'अबतक का सबसे कठिन पेपर कहना गलत'

एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि यह 'यूपीएससी का अब तक का सबसे कठिन प्रश्नपत्र' हो सकता है, और यह भी बताया गया कि नौकरशाहों को भी इसे हल करने में कठिनाई हुई. कई यूजर्स ने पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यूपीएससी प्रीलिम्स 2026 के प्रश्नपत्र को अब तक का सबसे कठिन कहना सही नहीं है, बल्कि यह 'अप्रत्याशित और अपरंपरागत' था.

'भाग्य पर आधारित परीक्षा'

एक अन्य X यूजर ने कहा- 'परीक्षा कठिन थी. पहले तो यही बात मान लेते हैं. इस साल के प्रश्नपत्र अपरंपरागत थे, और UPSC ने सबको चौंका दिया. लेकिन सच कहूं तो, UPSC इसी के लिए जानी जाती है. वे लगातार कुछ न कुछ कम करने के तरीके खोजते रहते हैं, और यह तरीका उनके लिए कारगर भी साबित होता है. हमें इस पर उदास नहीं होना चाहिए.'

X पर एक यूजर ने डॉ. शिविन का वीडियो शेयर किया, जो UPSC के मेंटर हैं और उन्होंने UPSC CSE 2022 में 297वीं रैंक हासिल की थी. डॉ. शिविन ने कहा कि यह परीक्षा किस्मत पर आधारित थी. उन्होंने आगे कहा कि छात्रों का चयन पूरी तरह से उनकी किस्मत के आधार पर होगा.