भारत में Gen-Z को नौकरी मिलने में क्यों हो रही मुश्किल, LinkedIn की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

लिंक्डइन रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 83% जेन-जी पेशेवर जज किए जाने के डर से नेटवर्किंग में झिझकते हैं. हालांकि, 90% से अधिक सीनियर पेशेवर उनकी मदद के लिए तैयार हैं.

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Sagar Bhardwaj

लिंक्डइन (LinkedIn) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जेन-जी (Gen Z) पेशेवरों की एक बड़ी आबादी करियर में मदद कर सकने वाले लोगों से संपर्क करने में कतराती है. करीब 83 प्रतिशत युवा पेशेवर नेटवर्किंग करने में झिझकते हैं. यद्यपि 79 प्रतिशत युवा पेशेवर संबंधों के महत्व को समझते हैं, लेकिन 52 प्रतिशत को यह नहीं पता कि इसकी शुरुआत कैसे की जाए.

डर और अनिश्चितता का माहौल

रिपोर्ट में पाया गया कि 44 प्रतिशत युवा जज किए जाने के डर से पीछे हट जाते हैं. इसके अलावा, दूसरों को परेशान करने का डर (39%) और खुद को अवास्तविक (inauthentic) समझे जाने की चिंता (37%) उनके रास्ते की बड़ी बाधाएं हैं. हालांकि, लिंक्डइन के आंकड़ों के अनुसार, अंदरूनी संपर्क (inside connection) वाले नौकरी आवेदकों के चुने जाने की संभावना अन्य की तुलना में 8.5 गुना अधिक होती है.

मार्गदर्शन का अभाव

रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 59 प्रतिशत जेन-जी पेशेवरों का मानना है कि उन्हें कभी किसी ने पेशेवर रिश्ते बनाना नहीं सिखाया. सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण वे यह समझ नहीं पाते कि किससे, कब और कैसे संपर्क किया जाए.


सीनियर पीढ़ी मदद को तैयार

युवाओं की इस झिझक के विपरीत, पुरानी पीढ़ी मदद के लिए तत्पर है. सर्वे में शामिल 92 प्रतिशत मिलेनियल्स और 95 प्रतिशत जेन-एक्स पेशेवरों ने कहा कि वे किसी भी शुरुआती करियर वाले व्यक्ति की मदद करने को तैयार हैं. लिंक्डइन एक्सपर्ट नीराजीता बनर्जी का कहना है कि छोटे-छोटे संवाद ही विश्वास कायम करते हैं और भविष्य में नए अवसरों के द्वार खोलते हैं.