Bihar Teacher Bharti 2026: बिहार में सरकारी टीचर बनने वालों के लिए जरूरी खबर, अब टीईटी नहीं चलेगा, सिर्फ सीटेट से मिलेगी नौकरी
बिहार सरकार ने प्रारंभिक और मध्य विद्यालयों के लिए राज्य स्तरीय टीईटी परीक्षा खत्म करने का फैसला लिया है. अब सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए केवल सीटेट पास अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकेंगे. इस फैसले से लाखों उम्मीदवारों की तैयारी की रणनीति बदल जाएगी.
पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है. राज्य के बिहार शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया है कि अब कक्षा 1 से 8 तक के लिए राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. इस फैसले के बाद अब केवल सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी सीटेट पास अभ्यर्थी ही शिक्षक बहाली के लिए पात्र माने जाएंगे. विभाग के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सीटेट हर साल नियमित रूप से होती है. राज्य सरकार का मानना है कि सीटेट पास उम्मीदवारों की संख्या पर्याप्त है, जिससे शिक्षक बहाली की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं.
करीब तीन साल पहले ही विभाग ने संकेत दिया था कि फिलहाल राज्य स्तरीय टीईटी आयोजित नहीं की जाएगी. उस समय भविष्य में परीक्षा कराने की संभावना खुली रखी गई थी. लेकिन अब यह साफ कर दिया गया है कि अलग से टीईटी कराने की जरूरत नहीं है.
बिहार में टीईटी का इतिहास
बिहार में अब तक केवल दो बार टीईटी का आयोजन हुआ है. यह परीक्षा Bihar School Examination Board के माध्यम से कराई गई थी. पहली बार वर्ष 2011 में और दूसरी बार 2017 में परीक्षा आयोजित की गई थी. इस परीक्षा के दो स्तर थे.
- प्राथमिक स्तर - कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की पात्रता जांच.
- उच्च प्राथमिक स्तर - कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की पात्रता निर्धारण.
अब भविष्य की भर्तियों में केवल सीटेट के पेपर 1 और पेपर 2 को ही मान्यता दी जाएगी.
अभ्यर्थियों पर क्या पड़ेगा असर
इस फैसले का सीधा असर उन लाखों उम्मीदवारों पर पड़ेगा जो बिहार टीईटी की तैयारी कर रहे थे. अब उन्हें अपनी तैयारी का फोकस सीटेट पर करना होगा. सरकार का मानना है कि इससे चयन प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और बार बार परीक्षा आयोजित करने का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा. आने वाली शिक्षक भर्तियों में वही उम्मीदवार आवेदन कर पाएंगे जिन्होंने सीटेट के पेपर 1 कक्षा 1 से 5 के लिए या पेपर 2 कक्षा 6 से 8 के लिए उत्तीर्ण किया हो.
एक्सपर्ट का कहना है कि सीटेट की अनिवार्यता से प्रतियोगिता बढ़ सकती है, क्योंकि अब राज्य और राष्ट्रीय स्तर के उम्मीदवार एक समान परीक्षा के आधार पर पात्र होंगे. उम्मीदवारों को सलाह दी जा रही है कि वे सीटेट की तैयारी के लिए सिलेबस और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर ध्यान दें.