Inspiring Journey: जिसे कहा था ‘क्रिमिनल की बेटी’, उसी ने अफसर बनकर दिया करारा जवाब; जानें DSP आयुषी की कहानी
आयुषी सिंह की जिंदगी में 23 फरवरी 2015 का दिन ऐसा तूफान लेकर आया, जिसने उनका बचपन और परिवार दोनों बदल दिए. कोर्ट परिसर में उनके पिता की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
Inspiring Journey: कुछ मुश्किलें इंसान को तोड़ देती हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हीं हालातों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं. आयुषी सिंह की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष की है. 23 फरवरी 2015 को कोर्ट परिसर में उनके पिता की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. आयुषी को समाज के ताने भी सहने पड़े, लेकिन उन्होंने अपने सपने को खत्म नहीं होने दिया.
पढ़ाई में शुरू से आगे थीं आयुषी
आयुषी बचपन से पढ़ाई में मेधावी थीं. पिता की हत्या ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि लोगों के ताने शुरू हो गए. उन्हें ‘क्रिमिनल की बेटी’ कहकर उनकी क्षमता पर सवाल उठाए गए. इन बातों ने उन्हें परेशान जरूर किया, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला.
पिता के सपने को बनाया अपना लक्ष्य
11वीं की पढ़ाई के कठिन दौर के बाद आयुषी ने पिता के अधूरे सपने को अपनी जिंदगी का उद्देश्य बना लिया. 12वीं के बाद वह दिल्ली यूनिवर्सिटी पहुंचीं. पढ़ाई के दौरान उन्होंने तय किया कि सिविल सेवा में जाकर ही वह अपने पिता की खोई प्रतिष्ठा वापस दिला सकती हैं. यही सोच उनकी तैयारी की सबसे बड़ी वजह बनी.
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पहली असफलता से नहीं टूटी हिम्मत
सिविल सेवा की तैयारी आसान नहीं रही. पहले प्रयास में प्रीलिम्स परीक्षा में असफलता मिली. यह झटका उनके लिए मुश्किल था, लेकिन उन्होंने तैयारी बंद नहीं की. भाई के सहयोग से वह आगे बढ़ती रहीं. उन्होंने उत्तराखंड सिविल सेवा और UPPSC जैसी परीक्षाओं को लक्ष्य बनाकर अपनी मेहनत जारी रखी.
मेहनत ने दिलाई बड़ी सफलता
लगातार प्रयासों के बाद अप्रैल 2023 में घोषित UPPSC 2022 के परिणाम में आयुषी ने सफलता हासिल की. उन्होंने 62वीं रैंक प्राप्त की. इस उपलब्धि के साथ उनका DSP बनने का सपना पूरा हुआ. यह उनके लिए सिर्फ नौकरी हासिल करने का पल नहीं था, बल्कि लंबे संघर्ष के बाद मिली बड़ी जीत भी थी.
तानों का जवाब बनी कामयाबी
जिन लोगों ने कभी आयुषी को उनके पिता के नाम से जोड़कर उनकी काबिलियत पर सवाल उठाए थे, उनके सामने अब तस्वीर बदल चुकी थी. आयुषी ने अपनी मेहनत से साबित किया कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके हालात या दूसरों के लगाए ठप्पे से तय नहीं होती. उनकी सफलता ने परिवार का हौसला भी बढ़ाया.
पिता के सपने को मिला नया मुकाम
DSP बनना आयुषी के लिए उनके पिता के अधूरे सपने को पूरा करने जैसा था. एक दर्दनाक घटना के बाद शुरू हुआ उनका संघर्ष आखिरकार कामयाबी में बदला. उनकी कहानी बताती है कि मुश्किल समय कितना भी भारी क्यों न हो, लक्ष्य के प्रति लगातार मेहनत और हिम्मत इंसान को अपनी मंजिल तक पहुंचा सकती है.