AI का बढ़ता असर! डिग्री के बाद भी क्यों नहीं मिल रही युवाओं को पहली नौकरी?

कॉलेज की डिग्री हासिल करने के बाद लाखों युवाओं का एक ही सपना होता है कि उन्हें एक अच्छी नौकरी मिल जाए. लेकिन समय अब पहले जैसा नहीं रहा. अब नौकरी मिलना पहले के मुकाबले काफी मुश्किल हो चला है.

ChatGPT AI
Shilpa Srivastava

नई दिल्ली: कॉलेज की डिग्री हासिल करने के बाद लाखों युवाओं का एक ही सपना होता है कि उन्हें एक अच्छी नौकरी मिल जाए. लेकिन समय अब पहले जैसा नहीं रहा. अब नौकरी मिलना पहले के मुकाबले काफी मुश्किल हो चला है. इसकी एक बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है. AI का इस्तेमाल मुख्य तौर पर  टेक्नोलॉजी और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में काफी तेजी से किया जा रहा है. इससे फ्रेशर्स पर काफी दवाब पड़ रहा है और उन्हें नौकरी मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

नौकरियों के मौके AI कर रहा है खत्म?

पहले किसी कंपनी में जब नए कर्मचारी जुड़ते थे तो उनसे डॉक्यूमेंट्स को चेक करना, लोन प्रोसेसर, बिल बनाना, अकाउंट्स, चेक कराना और नॉर्मल कोडिंग जैसे काम करवाए जाते थे. धीरे-धीरे लोग काम सीखते थे और फिर बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार होते थे. लेकिन अब AI टूल्स इनमें से कई काम कम समय में कर सकते हैं. यही कारण है कि इन कामों के लिए अब फ्रेशर्स को हायर नहीं किया जा रहा है, जिससे उनके सामने चुनौती खड़ी हो गई है. 

TCS और Infosys में भर्ती की रफ्तार पर असर: 

आईटी सेक्टर की बात की जाए तो देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए बेहद अहम माना जाता है. करीब 60 लाख लोग इस इंडस्ट्री से जुड़े हैं. बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में बड़ी विदेशी कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स भी युवाओं को रोजगार देते रहे हैं. लेकिन अब कंपनियां भर्ती करते समय पहले से ज्यादा सावधानी बरत रही हैं. 


कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, करंट फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती नौ महीनों में देश की प्रमुख आईटी कंपनियों ने पहले के मुकाबले कम नए कर्मचारी जोड़े हैं. इसके अलावा इन्फोसिस की बात करें तो इस कंपनी ने पिछले साल कुछ ट्रेनिज के कॉन्ट्रैक्ट भी खत्म कर दिए थे.  वहीं, TCS ने दुनियाभर में लगभग 12,000 नौकरियों में कटौती का प्लान किया था. इससे आईटी सेक्टर में नौकरी पाने की उम्मीद कर रहे युवाओं की चिंता बढ़ी है.

2030 तक 30% काम हो सकता है ऑटोमेट:

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, 2030 तक भारत में काम के कुल घंटों का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा ऑटोमेट किया जा सकता है. इसका मतलब है कि कई काम इंसानों के बजाय मशीनों और AI की मदद से किए जा सकेंगे. इसका असर सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं है. सेल्स, मार्केटिंग, फाइनेंस, कस्टमर सपोर्ट और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी काम करने का तरीका बदल रहा है.

हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि सभी नौकरियां खत्म हो जाएंगी. कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत भी होगी, जो नई तकनीक को समझ सकें और उसका सही इस्तेमाल करना जानते हों.

फ्रेशर्स के सामने अनुभव की चुनौती:

इससे एक बड़ी परेशानी सामने आ रही है, जिसमें फ्रेशर्स को एक्सपीरियंस को लेकर चुनौती मिल रही है. आज कंपनियां AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों का ज्ञान रखने वाले उम्मीदवारों को प्रायोरिटी दे रही है. लेकिन जो लोग अभी-अभी ग्रेजुएट हुए हैं उन्हें एक्सपीरियंस हासिल करने के लिए जॉब चाहिए, जो AI के चलते उन्हें मिल नहीं रही. वहीं, कंपनियां लोगों से एक्सपीरियंस मांग रही हैं. ऐसे में युवाओं के लिए अब केवल डिग्री पर निर्भर रहना ही सही नहीं है. बल्कि उन्हें अब अपनी डिग्री के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स भी डेवलप करने होंगे. 

युवाओं को अब क्या करना चाहिए?

नौकरी की बेहतर संभावनाओं के लिए युवाओं को AI टूल्स का इस्तेमाल सीखना चाहिए. इसके अलावा, इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स और ऑनलाइन ट्रेनिंग के जरिए अनुभव हासिल करना भी उपयोगी हो सकता है.