युद्ध समाप्ति को लेकर रूस-अमेरिका-यूक्रेन की बैठक खत्म, जेलेंस्की ने बताया क्या नतीजा निकला?
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दो टूक कहा कि यूक्रेन किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेगा. उन्होंने कहा कि बातचीत आसान नहीं थी, लेकिन माहौल सकारात्मक और व्यावहारिक रहा.
यूक्रेन, रूस और अमेरिका के बीच अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता से हुई दो दिवसीय त्रिपक्षीय शांति वार्ता शनिवार को समाप्त हो गई. यूक्रेन ने इन बातचीतों को रचनात्मक बताया है. खास बात यह रही कि कई वर्षों बाद पहली बार तीनों देश एक ही मंच पर आमने-सामने बैठे और युद्ध खत्म करने के संभावित रास्तों पर चर्चा हुई.
जेलेंस्की बोले- बातचीत सकारात्मक रही
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि इन बैठकों में युद्ध समाप्त करने के संभावित ढांचे और भविष्य में किसी भी समझौते को टिकाऊ बनाने के लिए जरूरी सुरक्षा गारंटी पर फोकस किया गया. उन्होंने कहा कि बातचीत आसान नहीं थी, लेकिन माहौल सकारात्मक और व्यावहारिक रहा.
कौन-कौन रहा बातचीत में शामिल
यूक्रेन की ओर से वार्ता का नेतृत्व रक्षा मंत्री रुस्तेम उमेरोव ने किया. उनके साथ सैन्य खुफिया प्रमुख किरिलो बुडानोव भी मौजूद थे. रूस की तरफ से उसके सशस्त्र बलों और मिलिट्री इंटेलिजेंस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. वहीं अमेरिका की टीम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जैरेड कुशनर और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार शामिल थे.
अमेरिका ने रखे संभावित सुझाव
जेलेंस्की के अनुसार, अमेरिका ने भविष्य में किसी सीजफायर या शांति समझौते की स्थिति में निगरानी और देखरेख से जुड़े कुछ प्रस्ताव सामने रखे. इन प्रस्तावों पर तीनों पक्षों ने विचार किया और सहमति बनी कि हर देश अपनी राजधानी लौटकर नेतृत्व को पूरी रिपोर्ट देगा.
बातचीत के बावजूद हमले जारी
इन शांति प्रयासों के बीच जमीनी हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं. यूक्रेन के कई शहरों जैसे कीव और खारकीव पर रूसी ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रहे. इन हमलों में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई और लाखों लोगों की बिजली व हीटिंग सप्लाई प्रभावित हुई, खासकर तब जब तापमान शून्य से नीचे चला गया.
यूक्रेन का साफ रुख
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दो टूक कहा कि यूक्रेन किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेगा. उन्होंने माना कि बातचीत से उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अभी नतीजों पर फैसला करना बहुत जल्दी होगा. तीनों देशों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में फॉलो-अप बैठक हो सकती है. हालांकि, युद्ध और कूटनीति के बीच यह रास्ता अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.