बम, मिसाइल और ताकत सब बेअसर, वियतनाम के सामने घुटनों पर आया अमेरिका-इतिहास की सबसे शर्मनाक हार की पूरी कहानी
दुनिया की सबसे ताकतवर ताकत माने जाने वाले अमेरिका को भी एक छोटे से देश के सामने झुकना पड़ा था. वियतनाम युद्ध सिर्फ एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा अध्याय है जिसने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि जंग केवल हथियारों से नहीं जीती जाती.
आज जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है और ईरान के साथ अमेरिका की टकराहट चर्चा में है, तब इतिहास के पन्नों से वियतनाम युद्ध की याद फिर ताजा हो गई है. यह वही जंग है, जहां अमेरिका ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन आखिरकार उसे पीछे हटना पड़ा. आधुनिक हथियार, बमबारी और तकनीक के बावजूद अमेरिका इस युद्ध को जीत नहीं सका. यह संघर्ष दिखाता है कि हर लड़ाई सिर्फ ताकत से नहीं जीती जाती.
कैसे छोटे देश ने हराया?
वियतनाम जैसे छोटे देश ने अमेरिका जैसी महाशक्ति को चौंका दिया. वहां के लोगों ने अपनी जमीन और आजादी के लिए जिस जज्बे से लड़ाई लड़ी, उसने अमेरिकी सेना को कमजोर कर दिया. यह सिर्फ सैनिकों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि पूरे देश का संघर्ष था. किसान, मजदूर और आम लोग भी इस युद्ध का हिस्सा बन गए थे. इसी वजह से अमेरिका के लिए यह लड़ाई आसान नहीं रही.
जंग की शुरुआत कैसे हुई?
वियतनाम लंबे समय तक फ्रांस का उपनिवेश रहा. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब आजादी की लहर चली, तो हो ची मिन्ह के नेतृत्व में वियतनाम ने भी स्वतंत्रता की मांग तेज कर दी. 1954 में फ्रांस की हार के बाद वियतनाम को दो हिस्सों में बांट दिया गया. उत्तर वियतनाम में कम्युनिस्ट सरकार बनी, जबकि दक्षिण वियतनाम को अमेरिका का समर्थन मिला। यहीं से टकराव की नींव रखी गई.
अमेरिका क्यों कूदा जंग में?
अमेरिका को डर था कि अगर पूरे वियतनाम में चुनाव हुए, तो कम्युनिस्ट नेता हो ची मिन्ह जीत जाएंगे. इसी डर के कारण अमेरिका ने दक्षिण वियतनाम का समर्थन किया और धीरे-धीरे इस संघर्ष में पूरी तरह शामिल हो गया. 1964 में टोंकिन खाड़ी की घटना को आधार बनाकर अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. इसके बाद युद्ध ने भयानक रूप ले लिया.
जंग में क्या हुआ?
1955 से 1975 तक चले इस युद्ध में अमेरिका ने लाखों टन बम गिराए. एजेंट ऑरेंज जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल किया गया, जिससे जंगल और फसलें तबाह हो गईं. लेकिन इसके बावजूद वियतनामी सैनिकों का हौसला नहीं टूटा. वे छापामार रणनीति अपनाकर हमला करते और फिर जंगलों में गायब हो जाते. इस तरीके ने अमेरिकी सेना को काफी परेशान किया.
हार के पीछे क्या कारण?
वियतनाम की भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी. दलदली जमीन, घने जंगल और सुरंगों का जाल अमेरिकी हथियारों को बेअसर कर रहा था. इसके अलावा अमेरिका के अंदर भी इस युद्ध के खिलाफ विरोध बढ़ने लगा. टीवी पर युद्ध के दृश्य देखकर जनता में गुस्सा फैल गया. सैनिकों का मनोबल भी गिरने लगा, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे किसके लिए लड़ रहे हैं.
जंग का अंत और सबक
1968 के टेट हमले के बाद अमेरिका को एहसास हो गया कि यह जंग जीतना संभव नहीं है. भारी नुकसान और विरोध के चलते उसने अपनी सेना वापस बुलानी शुरू कर दी. 1975 में उत्तर वियतनाम ने सैगन पर कब्जा कर लिया और देश एक हो गया. यह हार अमेरिका के लिए एक बड़ा सबक बन गई. इस युद्ध ने साबित किया कि इच्छाशक्ति और अपनी जमीन के लिए लड़ने का जज्बा किसी भी बड़ी ताकत को हरा सकता है.