'ईरान पर अगले हफ्ते जोरदार हमला करेगा अमेरिका...,' ट्रंप ने दी खुली चेतावनी; पुतिन का भी किया जिक्र
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ अपने सैन्य हमलों को और तेज करेगी.
International Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ अपने सैन्य हमलों को और तेज करेगी. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गया है. शुक्रवार को प्रसारित एक इंटरव्यू में बोलते हुए, ट्रंप ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन ईरान के ठिकानों के खिलाफ अभियानों के एक नए चरण की तैयारी कर रहा है. ट्रंप ने कहा, "हम अगले हफ्ते उन पर बहुत जोरदार हमला करने जा रहे हैं".
ईरान की मदद कर सकता है रूस
राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि इस संघर्ष के दौरान रूस चुपके से ईरान की मदद कर सकता है. ट्रंप की यह टिप्पणी कई अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स की उन रिपोर्टों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि रूस ने शायद ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी दी है, जिससे तेहरान को चल रहे युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना पर हमला करने में मदद मिल सकती है. उसी इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शायद तेहरान को समर्थन दे रहे हैं. ट्रंप ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया, "मुझे लगता है कि वह शायद उसकी थोड़ी-बहुत मदद कर रहे हैं, हां, मेरा अंदाज़ा यही है और शायद उन्हें लगता है कि हम यूक्रेन की मदद कर रहे हैं, है ना?".
सोशल मीडिया पर पोस्ट
इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी. हाल के हमलों में ईरान के नेतृत्व को मार गिराने का श्रेय खुद लिया. उन्होंने कहा कि ईरान के नेतृत्व को मार गिराने की ज़िम्मेदारी लेना उनके लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है और उन्हें पागल और नीच लोग बताया.
रक्षा सचिव का बयान
सैन्य कार्यवाहियों की पुष्टि करते हुए, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिकी सेना शुक्रवार को ईरान पर इस युद्ध के अब तक के किसी भी दिन की तुलना में कहीं अधिक जोरदार बमबारी करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता, मोज्तबा खामेनेई 28 फरवरी के हमले में घायल हो गए थे और संभवतः उनका चेहरा भी बिगड़ गया है". इसी हमले में उनके पिता और पूर्ववर्ती अली खामेनेई की मौत हो गई थी और इसी के साथ अमेरिका-इजराइल अभियान की शुरुआत हुई थी.