गाजा शांति मिशन में पाकिस्तान की एंट्री? ट्रंप के पीस बोर्ड को लेकर इस्लामाबाद का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा और इजरायल के बीच शांति के लिए पीस बोर्ड बनाने का ऐलान किया है. पाकिस्तान को इसमें शामिल होने का न्योता मिला है, जबकि इजरायल ने इस पहल पर नाराजगी जताई है.
नई दिल्ली: गाजा और इजरायल के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को शांत करने की कोशिशों के बीच अमेरिका ने एक नई पहल की है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति वार्ता के दूसरे चरण के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पीस बोर्ड के गठन की घोषणा की है. इस बोर्ड में कई देशों और वैश्विक हस्तियों को शामिल किया जा रहा है. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी इस बोर्ड में आमंत्रण मिला है, जबकि इजरायल ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा और इजरायल के बीच शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक पीस बोर्ड बनाने की घोषणा की है. यह बोर्ड शांति वार्ता के दूसरे चरण में अहम भूमिका निभाएगा. व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह पहल क्षेत्र में स्थायी शांति और पुनर्निर्माण के उद्देश्य से की गई है. ट्रंप खुद इस बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे और वैश्विक नेताओं के साथ मिलकर रणनीति तय करेंगे.
पाकिस्तान को मिला औपचारिक न्योता
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ताहिर अंदराबी ने दावा किया है कि पाकिस्तान को अमेरिका की ओर से औपचारिक निमंत्रण मिल चुका है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस पीस बोर्ड में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. अंदराबी के अनुसार पाकिस्तान हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और सुरक्षा के प्रयासों का समर्थन करता रहा है और गाजा में स्थायी शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप योगदान देगा.
कौन-कौन होंगे बोर्ड का हिस्सा?
व्हाइट हाउस के अनुसार पीस बोर्ड में करीब 60 देशों को शामिल होने का न्योता भेजा गया है. इनमें तुर्की, मिस्र, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, इटली, मोरक्को, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं. इसके अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और ट्रंप के वरिष्ठ वार्ताकार जरेड कुश्नर तथा स्टीव विटकॉफ भी पैनल का हिस्सा होंगे.
इजरायल की नाराजगी और आपत्ति
अमेरिका की इस पहल से इजरायल संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि पीस बोर्ड के गठन से पहले इजरायल से कोई सलाह नहीं ली गई. उन्होंने इसे इजरायल की नीतियों के खिलाफ बताया और कहा कि गाजा से जुड़े किसी भी कार्यकारी बोर्ड पर फैसला लेने से पहले इजरायल की राय जरूरी है. नेतन्याहू ने संकेत दिए कि इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों से जल्द बातचीत की जाएगी.
वैश्विक राजनीति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह पीस बोर्ड मध्य पूर्व की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है. एक तरफ जहां कई देश इसे शांति की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं, वहीं इजरायल की नाराजगी इस पहल को जटिल बना सकती है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह बोर्ड गाजा संकट के समाधान में कितनी प्रभावी भूमिका निभा पाता है और अमेरिका की यह रणनीति जमीन पर कितना असर डालती है.
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