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कंबोडिया से जारी भीषण जंग के बीच थाईलैंड ने स्वीकार किया मलेशिया का युद्धविराम प्रस्ताव, लेकिन रख दी ये शर्त

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच प्रासात ता मुएन थॉम जैसे ऐतिहासिक स्थलों को लेकर दशकों पुराना सीमा विवाद हाल के महीनों में हिंसक रूप ले चुका है.

Sagar Bhardwaj

थाईलैंड के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को घोषणा की कि उसने कंबोडिया के साथ चल रहे सैन्य विवाद के बीच मलेशिया के युद्धविराम प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है. मंत्रालय ने कहा कि वह इस योजना पर विचार करेगा, लेकिन यह "जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप" होनी चाहिए. इस कदम को दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

कंबोडिया पर थाईलैंड के आरोप

थाईलैंड ने कंबोडिया पर सीमा क्षेत्र में निरंतर हमलों का आरोप लगाया है. विदेश मंत्रालय ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दिन भर कंबोडियाई बलों ने थाई क्षेत्र पर अंधाधुंध हमले जारी रखे हैं.” मंत्रालय ने आगे कहा, “कंबोडिया के कार्यों से अच्छे इरादों की कमी झलकती है और ये नागरिकों को खतरे में डाल रहे हैं.” थाईलैंड का दावा है कि कंबोडिया की आक्रामकता ने शांति वार्ता की संभावनाओं को कमजोर किया है.

दोनों देशों में क्यों हो रहा विवाद

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच प्रासात ता मुएन थॉम जैसे ऐतिहासिक स्थलों को लेकर दशकों पुराना सीमा विवाद हाल के महीनों में हिंसक रूप ले चुका है. मई 2025 में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत के बाद तनाव बढ़ा, और गुरुवार को दोनों पक्षों के बीच जेट विमानों, तोपखाने और टैंकों के साथ भारी सैन्य टकराव हुआ. इस हिंसा से हजारों लोग विस्थापित हुए हैं, और थाईलैंड ने 138,000 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है.

आगे की राह

मलेशियाई प्रस्ताव दोनों देशों के लिए शांति स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है, लेकिन थाईलैंड ने स्पष्ट किया कि युद्धविराम तभी संभव है जब कंबोडिया हमले बंद करे. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी इस संकट पर चर्चा के लिए आपात बैठक आयोजित करने वाली है.