नेपाल में दर्दनाक हादसा, अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी यात्रियों से भरी बस; 12 लोगों की मौत
हादसे में अबतक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. नेपाल की मीडिया के अनुसार, मंथली अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केशव सिंह धामी ने बताया कि मृतकों में से 10 यात्रियों की पहचान कर ली गई है.
नई दिल्ली: भारत के पड़ोसी देश नेपाल से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है. मध्य नेपाल में मंगलवार को एक यात्री बस अनियंत्रित होकर नदी में गिर गई. इस भयावह दुर्घटना में बस में सवार 12 यात्रियों की मौत हो गई. हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया.
सुबह 11 बजे हुआ हादसा
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह दुर्घटना मंगलवार सुबह करीब 11 बजे हुई. बस राजधानी काठमांडू से ओखलढुंगा की ओर जा रही थी. इसी दौरान बागमती प्रांत के रामेछाप नगरपालिका क्षेत्र में बस अचानक सड़क से फिसल गई और तामाकोशी नदी में जा गिरी. तामाकोशी नदी काठमांडू से लगभग 150 किलोमीटर पूर्व में स्थित है.
12 यात्रियों की मौत की पुष्टि
इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. नेपाल की मीडिया के अनुसार, मंथली अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केशव सिंह धामी ने बताया कि मृतकों में से 10 यात्रियों की पहचान कर ली गई है. शेष दो मृतकों की शिनाख्त के प्रयास जारी हैं. शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल में रखा गया है.
आठ लोग घायल, अस्पताल में भर्ती
रामेछाप जिले के पुलिस निरीक्षक राजन प्रसाद तिमिल्सिना ने जानकारी दी कि इस दुर्घटना में बस चालक समेत आठ लोग घायल हुए हैं. घायलों को खुरकोट स्थित जीवन अस्पताल और मंथली अस्पताल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के अनुसार, सभी घायलों का इलाज जारी है और कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है.
रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच जारी
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों, सुरक्षाकर्मियों और बचाव दल ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. नदी में गिरी बस से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया. पुलिस ने बस चालक को हिरासत में ले लिया है. फिलहाल लापता यात्रियों की तलाश जारी है और प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है.
नेपाल में सड़क हादसों पर कैसे लगेगी लगाम?
नेपाल में सड़क हादसे कम करने के लिए बेहतर सड़क निर्माण, सख्त नियम, ड्राइवर प्रशिक्षण और आधुनिक वाहन सुरक्षा बेहद जरूरी है. जब तक इन सभी स्तरों पर सुधार नहीं होगा, हादसे रुकना मुश्किल है.
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