'राफेल डील भारत को ही मजबूत करेगी', फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने विपक्ष को दिया जवाब
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दिल्ली में राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे का पुरजोर समर्थन किया है. उन्होंने आलोचनाओं को खारिज करते हुए इसे भारत की सैन्य मजबूती के लिए अत्यंत अनिवार्य और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है.
दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने विशेष रूप से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील का बचाव किया, जिसे हाल ही में भारतीय रक्षा अधिग्रहण परिषद ने मंजूरी दी है. मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यह समझौता न केवल भारत की सुरक्षा को चाक-चौबंद करता है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच अटूट भरोसे और दीर्घकालिक सहयोग की एक नई और गौरवशाली इबारत भी लिखता है.
राफेल सौदे की लागत पर लगातार उठ रहे थे सवाल
मैक्रों ने उन आवाजों को शांत करने का प्रयास किया जो राफेल सौदे की लागत या प्रक्रिया पर निरंतर सवाल उठा रहे थे. उन्होंने कहा कि राफेल केवल एक आधुनिक विमान नहीं है, बल्कि यह भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और सैन्य क्षमता को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली हथियार है. उनके अनुसार, ऐसी आलोचनाएं पूरी तरह बेबुनियाद हैं क्योंकि यह रक्षा सौदा सीधे तौर पर भारत को वैश्विक पटल पर एक बेहद सशक्त और आधुनिक सैन्य शक्ति के रूप में मजबूती से स्थापित कर रहा है.
भारत को सशक्त बनाने वाला समझौता
राष्ट्रपति ने मंच से स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक सौदे के व्यावसायिक और तकनीकी पहलुओं पर दसॉल्ट एविएशन और भारत सरकार के बीच निरंतर सीधा संवाद बना हुआ है. उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यावसायिक पेचीदगियों के बावजूद, इस रणनीतिक साझेदारी का व्यापक और प्राथमिक उद्देश्य भारत की तात्कालिक रक्षा जरूरतों को कुशलतापूर्वक पूरा करना है. मैक्रों को इस बात पर घोर आश्चर्य हुआ कि लोग इतने महत्वपूर्ण और देश को हर प्रकार से सशक्त बनाने वाले रक्षा सौदे की आलोचना आखिर किस आधार पर कर रहे हैं.
'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भरता के प्रति अटूट विश्वास
मैक्रों ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया. उन्होंने बताया कि वे इस बात के प्रबल पक्षधर हैं कि राफेल के निर्माण में अधिक से अधिक भारतीय कलपुर्जों का ही उपयोग सुनिश्चित किया जाए. यह क्रांतिकारी कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' अभियान को नई ऊर्जा देगा. उन्होंने टाटा और एयरबस के बीच हुए सफल औद्योगिक समझौते का उदाहरण देते हुए कहा कि राफेल के मामले में भी ठीक वही तार्किक मॉडल अपनाया जाएगा.
सौदे से पैदा होंगे रोजगार के अवसर
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि इस मेगा रक्षा डील से न केवल सैन्य लाभ प्राप्त होगा, बल्कि भारत में बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे. जब इन लड़ाकू विमानों का निर्माण या रखरखाव स्थानीय स्तर पर किया जाएगा, तो इससे युवाओं के तकनीकी कौशल और औद्योगिक विकास को व्यापक बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने पूरे विश्वास के साथ आश्वासन दिया कि फ्रांस भारत का एक सच्चा और भरोसेमंद साथी है, और दोनों राष्ट्र मिलकर भविष्य की जटिल रक्षा चुनौतियों का डटकर सामना करेंगे.
3.25 लाख करोड़ रुपए होंगे खर्च
भविष्य की सुरक्षा और दोनों देशों का गहरा विश्वास मैक्रों की यह ताजा यात्रा और उनके बेबाक बयान भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों में एक नया ऐतिहासिक मोड़ लेकर आए हैं. करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस विशाल सौदे को राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने पहले ही मंजूरी देकर अपनी स्पष्ट मंशा जाहिर कर दी थी. मैक्रों ने अपने संबोधन के अंत में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि भारत की जनता और सरकार फ्रांस पर पूरी तरह भरोसा कर सकती है. यह रणनीतिक संबंध आने वाले दशकों तक दोनों देशों की साझा प्रगति का मुख्य आधार बनेंगे.