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पुतिन की युद्ध जीतने की 'कैमल' टेक्निक फेल, यूक्रेनी स्नाइपर ने ढेर कर दिया रूसी जवान, सामने आया घातक वीडियो

रूस की 'कैमल' रणनीति, जो कभी वैगनर बलों के लिए एक प्रभावशाली हथियार थी, अब आधुनिक युद्ध के परिप्रेक्ष्य में अपनी उपयोगिता खोती नजर आ रही है. टोरेत्स्क की घटना ने इस रणनीति की सीमाओं को उजागर कर दिया है. यूक्रेन की सेना ने एक बार फिर साबित किया है कि तकनीकी कौशल और सही रणनीति के साथ किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है.

Sagar Bhardwaj

Russia Ukraine War: रूस की नियमित सेना ने अपनी रणनीति में वैगनर ग्रुप द्वारा अपनाई गई 'कैमल' रणनीति को शामिल किया है. यह रणनीति तब कारगर मानी जाती थी, जब युद्ध के मैदान में ड्रोन का उपयोग सीमित था. लेकिन आज के समय में, ड्रोन ने इसे बेहद जोखिमभरा बना दिया है.

क्या है 'कैमल' रणनीति?
'कैमल' रणनीति के तहत आत्मघाती वाहकों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें बेहद खतरनाक इलाकों में गोला-बारूद, बारूदी सुरंगें, या संचार उपकरण जैसे महत्वपूर्ण सामग्रियां पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाती है. इन वाहकों को 'कैमल' इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे भारी हथियारबंद बॉडी आर्मर पहनते हैं, ताकि दुश्मन के इलाकों में गहराई तक पहुंच सकें.

28वीं अलग मैकेनाइज्ड ब्रिगेड, जिसे "नाइट्स ऑफ द फर्स्ट विंटर कैंपेन" के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार, इन 'कैमल' का मुख्य उद्देश्य यूक्रेनी मोर्चों के पास सामग्री पहुंचाना है. इन्हें "डिस्पोजेबल" यानी अस्थायी साधन के रूप में देखा जाता है, और यही कारण है कि इन्हें हथियारों से लैस नहीं किया जाता.

रणनीति की विफलता: टोरेत्स्क की घटना
रूस की 'कैमल' रणनीति को हाल ही में यूक्रेनी सेना के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा. टोरेत्स्क की दिशा में "ग्यूरजा" डिटेचमेंट की हवाई टोही यूनिट ने एक कैमल कामिकेज़ का पता लगाया. इसके बाद यूक्रेन की 28वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड के पैदल सैनिकों ने उसे बेअसर कर दिया. यह घटना दर्शाती है कि कैसे आधुनिक तकनीकों, विशेषकर ड्रोन, ने इस प्रकार की रणनीतियों को अप्रभावी बना दिया है.

ड्रोन के युग में कैमल रणनीति क्यों विफल हो रही है?
वैगनर ग्रुप द्वारा पहले से इस्तेमाल की गई 'कैमल' रणनीति बाकमुत की लड़ाई के दौरान सफल रही थी. उस समय, ड्रोन की अनुपस्थिति ने इसे उपयोगी बनाया. लेकिन मौजूदा युद्ध स्थिति में ड्रोन लगातार दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और ऐसी रणनीतियों को निष्फल कर देते हैं. यूक्रेनी सेना का मानना है कि ड्रोन की मौजूदगी और उनकी उच्च परिशुद्धता ने इस तरह की रणनीतियों को पुराना और अप्रभावी बना दिया है.