अमेरिका-ईरान के बीच रविवार को शांति समझौते पर होंगे हस्ताक्षर, होर्मुज की नाकेबंदी भी होगी खत्म: ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होंगे. उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के साथ ही होर्मुज की नाकेबंदी भी खत्म की जाएगी.
मध्य पूर्व में कई महीनों से जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होंगे. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. हालांकि ईरान की ओर से अभी इस समयसीमा को लेकर पूरी सहमति दिखाई नहीं गई है.
ट्रंप ने किया समझौते का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि शांति समझौते पर अगले दिन हस्ताक्षर होने की योजना है. उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के लागू होते ही होर्मुज स्ट्रेट सभी के लिए खोल दिया जाएगा. यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव का केंद्र बना हुआ है.
पाकिस्तान ने भी जताया भरोसा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का मसौदा लगभग तैयार है. उनके अनुसार अगले 24 घंटों के भीतर इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है. इस बयान ने क्षेत्र में शांति की संभावनाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है और कई देशों की नजरें अब अगले कुछ दिनों पर टिकी हुई हैं.
ईरान ने दिखाई सतर्कता
हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होने की संभावना नहीं है. मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है. उन्होंने यह भी माना कि रविवार को समझौते की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इससे स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर अभी बातचीत जारी है.
लंबे संघर्ष के बाद उम्मीद
अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद से स्थायी शांति समझौते के लिए लगातार वार्ताएं चल रही हैं. कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई थी. हालिया बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि दोनों पक्ष किसी समाधान के करीब पहुंच सकते हैं. यदि समझौता होता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय स्थिरता ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है.