'पाकिस्तान कर रहा बेतुकी बकवास, PM मोदी ही रोक सकते हैं जंग': डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार का बड़ा दावा
डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार और रिटायर्ड कर्नल ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है...
मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध के बीच एक बड़ा बयान सामने आया है जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सलाहकार और रिटायर्ड कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने पश्चिम एशिया संकट में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने इसे बेतुकी बकवास करार देते हुए कहा है कि केवल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इस युद्ध को रुकवाने की क्षमता रखते हैं.
"जलती इमारत में रहने जैसा है पाकिस्तान का ऑफर"
एक विशेष साक्षात्कार में मैकग्रेगर ने पाकिस्तान की आर्थिक और आंतरिक स्थिति पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान का मदद की पेशकश करना ऐसा है, जैसे कोई खुद जलती हुई इमारत में फंसा हो और आपको वहां कमरा देने का वादा करे." उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल कभी भी पाकिस्तान को एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि उसकी साख खत्म हो चुकी है.
PM मोदी ही क्यों हैं शांतिदूत'?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांतिदूत के रूप में उभरती भूमिका के पीछे उनकी बेजोड़ ग्लोबल क्रेडिबिलिटी है, जिसे पूर्व पेंटागन सलाहकार डगलस मैकग्रेगर ने तीन प्रमुख आधारों पर स्पष्ट किया है. मोदी की सबसे बड़ी शक्ति उनकी वह कूटनीतिक सहजता है, जिसके चलते वे एक ओर मॉस्को में व्लादिमीर पुतिन के साथ भरोसेमंद रिश्ते साझा करते हैं, तो दूसरी ओर तेहरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ भी उनके कामकाजी संबंध अत्यंत गहरे और पुराने हैं.
संकट के 4 हफ्तेः
28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग ने दुनिया को विनाश के मुहाने पर खड़ा कर दिया है:
- होर्मुज जलडमरूमध्य बंद: ईरान ने वैश्विक तेल सप्लाई के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते को बंद कर दिया है, जिससे कच्चा तेल $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है.
- पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था: पाकिस्तान वर्तमान में आर्थिक रूप से दिवालिया होने की कगार पर है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय बातों का वजन कम हो गया है.
- अमेरिकी दूतों पर सवाल: मैकग्रेगर ने स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर जैसे अमेरिकी दूतों को इजरायल का एजेंट बताते हुए उनकी निष्पक्षता पर भी संदेह जताया है.
- जंग का भविष्य: विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध महीनों तक खिंच सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी.