US Israel Iran War

US-ईरान शांति पहल नाकाम होने की खबरों पर भड़का पाकिस्तान, इंटरनेशनल बेइज्जती होने पर कही ये बात

पाकिस्तान ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की उसकी कोशिशें नाकाम हो गई हैं. विदेश मंत्रालय ने इसे कोरी कल्पना बताया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं. कुछ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दावा किया था कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की ताजा पहल ईरान की बेरुखी के कारण पूरी तरह रुक गई है. हालांकि इस्लामाबाद ने इन दावों को 'आधारहीन' और 'झूठा' करार देते हुए स्पष्ट किया है कि शांति और संवाद को बढ़ावा देने के उसके प्रयास निरंतर जारी हैं. यह स्पष्टीकरण क्षेत्र में बढ़ती सैन्य अस्थिरता के बीच आया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने हालिया मीडिया रिपोर्टों को 'कोरी कल्पना' करार दिया है. अंद्राबी ने कहा कि कूटनीतिक बातचीत के बारे में कथित सरकारी सूत्रों के हवाले से फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रालय द्वारा दी गई पृष्ठभूमि की जानकारी को मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया है. पाकिस्तान ने सभी मीडिया प्लेटफार्मों से आग्रह किया है कि वे ऐसे संवेदनशील समय में अटकलें लगाने के बजाय आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें.

मीडिया रिपोर्टों में क्या था दावा? 

'डॉन' और 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' जैसी रिपोर्टों में सुझाव दिया गया था कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेश भेजने में कुछ प्रगति हुई थी, लेकिन ईरान की ओर से स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण यह गति बहुत धीमी हो गई है. रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने इस्लामाबाद में किसी भी अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया है. इन दावों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की क्षमता पर सवाल उठाए थे, जिससे कूटनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई थी.

ईरान की चुप्पी पर उठते सवाल 

मीडिया रिपोर्टों में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया था कि ईरान के सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान होने के बावजूद वह बातचीत की मेज पर नहीं आ रहा है. हालांकि पाकिस्तान और चीन दोनों ने तेहरान को वार्ता के लिए प्रोत्साहित किया है. लेकिन अभी तक ईरान ने अपनी तैयारी के कोई औपचारिक संकेत नहीं दिए हैं. इसके बावजूद पाकिस्तानी नेतृत्व का दावा है कि वे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ लगातार संपर्क में बने हुए हैं.

क्षेत्र में पाकिस्तान की अहम भूमिका 

पाकिस्तान की यह कूटनीतिक सक्रियता काफी हद तक उसकी क्षेत्रीय सुरक्षा प्रतिबद्धताओं से प्रेरित है. इसमें सऊदी अरब की रक्षा करने का दायित्व भी शामिल है. यदि युद्ध और बढ़ता है तो पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा गारंटी पूरी करनी पड़ सकती है. हालांकि अभी तक कोई युद्धविराम नहीं हो सका है, लेकिन इस्लामाबाद ने खुद को सीधे तौर पर इस संघर्ष में शामिल होने से बचाए रखा है. पाकिस्तान का मुख्य उद्देश्य युद्ध को फैलने से रोकना और शांति बहाल करना है.

युद्ध की पृष्ठभूमि और वैश्विक असर 

यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता और कई शीर्ष कमांडर मारे गए थे. ईरान की जवाबी कार्रवाई ने युद्ध के क्षेत्र को और बड़ा कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है. विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला व्यापार बुरी तरह चरमरा गया है. पाकिस्तान की कोशिशें इसी व्यापारिक मार्ग और क्षेत्रीय स्थिरता को बचाने के लिए की जा रही हैं ताकि आर्थिक नुकसान को रोका जा सके.