'बाढ़ में साथ खड़े रहे भारत-चीन', नेपाल के PM बालेन शाह ने UN मंच से जताया शुक्रिया, अब मांगा बड़ा साथ
संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भोटेकोशी बाढ़ के दौरान भारत और चीन की तत्काल मदद की सराहना की. उन्होंने हिमालयी जलवायु आपदाओं को सीमाओं से परे बताते हुए तीनों देशों के बीच संयुक्त हिमालयी क्लाइमेट मैकेनिज्म बनाने का प्रस्ताव रखा.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारत और चीन के साथ मिलकर हिमालयी क्षेत्र में जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही. उन्होंने हालिया भोटेकोशी बाढ़ के दौरान भारत और चीन की ओर से मिली राहत और आपात सहायता का खासतौर पर जिक्र किया. नेपाल सरकार पहले भी संसद में दोनों पड़ोसी देशों की मदद को स्वीकार कर चुकी है. बालेन शाह ने कहा कि जलवायु आपदाएं किसी भी देश की सीमाओं को नहीं मानतीं और हिमालय में आने वाली आपदाओं का असर सीमा पार तक पहुंच सकता है.
सीमाएं नहीं मानतीं जलवायु आपदाएं
बालेन शाह ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालय में ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन जैसी घटनाओं का प्रभाव सीमा पार के इलाकों तक भी पहुंच सकता है. अगस्त में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ को नेपाल ने हिमालय में बढ़ते जलवायु जोखिमों की चेतावनी के तौर पर पेश किया है.
भारत चीन के साथ बनेगा खास तंत्र
बालेन शाह ने नेपाल, भारत और चीन के बीच एक संयुक्त हिमालयी क्लाइमेट मैकेनिज्म की जरूरत पर जोर दिया. इसके तहत हिमालयी क्षेत्र में आपदा के जोखिमों की निगरानी और समय रहते चेतावनी देने के लिए तीनों देशों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की बात कही गई.
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सैटेलाइट डेटा और अर्ली वार्निंग पर जोर
इस तरह के सहयोग में सैटेलाइट डेटा साझा करना, ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों की निगरानी करना, आपदा के समय सूचना का तेजी से आदान प्रदान करना और अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करना शामिल हो सकता है. भोटेकोशी त्रासदी के बाद नेपाल में अर्ली वार्निंग सिस्टम को प्राथमिकता देने की बात भी सामने आई है.
भोटेकोशी बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही
26 अगस्त को भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में भारी नुकसान पहुंचाया था. प्रधानमंत्री शाह ने इसे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिम से जोड़ते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सामूहिक कार्रवाई की अपील की थी.
पुनर्निर्माण और सुरक्षा रहे मुख्य मुद्दे
शाह की यूएनजीए यात्रा में क्लाइमेट जस्टिस, आपदा से हुए नुकसान की भरपाई, पुनर्निर्माण और हिमालयी क्षेत्र की जलवायु सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से नेपाल के साथ खड़े रहने की अपील दोहराई.
भारत और चीन पहले भी आए थे आगे
नेपाल सरकार पहले भी संसद के भीतर यह स्वीकार कर चुकी है कि भोटेकोशी बाढ़ के दौरान भारत और चीन दोनों ने तत्परता से मदद पहुंचाई थी. बालेन शाह के इस बयान ने एक बार फिर दोनों पड़ोसी देशों के साथ नेपाल के रिश्तों की गर्मजोशी को उजागर किया है.