नवाज शरीफ के पोते की दुल्हन ने पहना भारतीय डिजाइनर का बनाया लहंगा, पाकिस्तान में मचा बवाल, पूरा मामला जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पोते जुनैद सफदर की शादी में दुल्हन शंजे अली रोहैल ने भारतीय डिजाइनरों के आउटफिट पहने. मेहंदी में सब्यसाची मुखर्जी का लहंगा और शादी में तरुण ताहिलियानी की साड़ी पहनने के बाद पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पोते जुनैद सफदर की शादी इन दिनों पाकिस्तान ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा का विषय बनी हुई है. लाहौर में हुए इस भव्य विवाह समारोह में राजनीति से ज्यादा चर्चा दुल्हन के पहनावे को लेकर हो रही है. वजह यह है कि दुल्हन शंजे अली रोहैल ने अपनी शादी के अहम मौकों पर भारतीय मशहूर डिजाइनरों के आउटफिट पहने.
जुनैद सफदर जो नवाज शरीफ के पोते हैं लंबे समय से अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा से दूर रहते आए हैं. उनकी शादी लाहौर में पारंपरिक अंदाज में हुई जिसमें राजनीति कारोबारी और समाज के कई बड़े नाम शामिल हुए. शादी का माहौल बेहद भव्य था और हर रस्म को शाही अंदाज में निभाया गया.
दुल्हन की ड्रेस बनी चर्चा का केंद्र
इस शादी में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा दुल्हन शंजे अली रोहैल के पहनावे ने. मेहंदी की रस्म में उन्होंने भारत के मशहूर डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी द्वारा डिजाइन किया गया लहंगा पहना. यह लहंगा अपने पारंपरिक रंगों और बारीक कढ़ाई के कारण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
जैसे ही दुल्हन की तस्वीरें सामने आईं वैसे ही पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि इतने बड़े और प्रभावशाली परिवार की शादी में पाकिस्तानी डिजाइनरों को मौका क्यों नहीं दिया गया. कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ते हुए कहा कि पैसा भारतीय फैशन इंडस्ट्री को क्यों दिया गया.
एक यूजर ने लिखा कि पाकिस्तान में भी बेहतरीन डिजाइनर मौजूद हैं और उन्हें नजरअंदाज करना सही नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दा बना दिया.
दुल्हन के समर्थन में भी उठीं आवाजें
जहां एक तरफ नाराजगी देखने को मिली वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में लोग दुल्हन के समर्थन में भी सामने आए. कई यूजर्स ने कहा कि शादी दुल्हन का निजी अवसर होता है और उसे अपनी पसंद के कपड़े पहनने का पूरा हक है. फैशन को राजनीति से जोड़ना सही नहीं है. कुछ लोगों का कहना था कि आज के दौर में फैशन की कोई सीमा नहीं होती. कला और डिजाइन को देशों की सरहदों में बांधना पुरानी सोच को दर्शाता है.
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