परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान, अपना समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपने को हुआ राजी
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अमेरिका के साथ होने वाले नए शांति समझौते के तहत अपने समृद्ध यूरेनियम का पूरा भंडार छोड़ने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है.
नई दिल्ली: वाशिंगटन, इज़राइल और तेहरान के बीच बीते कई महीनों से जारी सैन्य संघर्ष पर अब विराम लगता नजर आ रहा है. प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ बन रहे नए शांति समझौते के तहत अपने सबसे खतरनाक और अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह से छोड़ने पर अपनी सहमति दे दी है. वही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को भी खोलने का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद इस संघर्ष के ख़त्म होने की उम्मीदें बढ़ गई है.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी विशेष रिपोर्ट में दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से इस कूटनीतिक प्रगति की पुष्टि की है. इन अधिकारियों के मुताबिक, तेहरान ने अपने इस परमाणु भंडार को सरेंडर करने की प्रतिबद्धता जताई है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान के इस समृद्ध भंडार का उपयोग बहुत ही कम समय में कई विनाशकारी परमाणु हथियार बनाने के लिए किया जा सकता था, जो अब समझौते के बाद संभव नहीं होगा.
ट्रंप ने दी थी भीषण कार्रवाई की चेतावनी
दरअसल, दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता में यूरेनियम का यह जखीरा सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ था, क्योंकि वाशिंगटन शुरू से ही तेहरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करने पर अड़ा था. ट्रंप ने बेहद कड़े लहजे में चेतावनी दी थी कि यदि कूटनीति का यह आखिरी रास्ता विफल रहता है, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा.
कमांडो हमले की गुप्त योजना
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य योजनाकारों ने हाल ही में ईरान के परमाणु केंद्रों को तबाह करने के लिए कई घातक ब्लूप्रिंट तैयार किए थे. इनमें बंकर भेदने वाले हवाई हमलों के साथ-साथ इस्फ़हान जैसे अति-संवेदनशील इलाकों में बने भूमिगत परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए एक संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली कमांडो ऑपरेशन भी शामिल था, हालांकि इस जमीनी हमले को अंतिम मंजूरी नहीं मिली थी.