ईरान ने यूरेनियम भंडार के रास्ते किए सील, संभावित परमाणु समझौते के बीच बढ़ी अमेरिका की चिंता

ईरान ने अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार के आसपास सुरक्षा और कड़ी कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार यूरेनियम की सुरंगों को बंद कर दिया गया है और उनके आसपास विस्फोटक जाल बिछाए गए हैं, जिससे भविष्य में इसकी जांच या निकासी मुश्किल हो सकती है.

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Sagar Bhardwaj

ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर संभावित समझौते की चर्चा तेज है, लेकिन इसी बीच एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है. अमेरिकी खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ईरान ने अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार तक पहुंचने वाले रास्तों को बंद कर दिया है. बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर सुरंगें गिरा दी गई हैं और प्रवेश मार्गों के आसपास विस्फोटक जाल लगाए गए हैं. इससे भविष्य में किसी भी निरीक्षण या नियंत्रण प्रक्रिया को चुनौती मिल सकती है.

 यूरेनियम भंडार के चारों ओर सुरक्षा

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने हाल के हफ्तों में उन भूमिगत क्षेत्रों की सुरक्षा बढ़ा दी है जहां उच्च संवर्धित यूरेनियम रखा गया है. माना जा रहा है कि इसका बड़ा हिस्सा इस्फहान परमाणु परिसर के नीचे मौजूद सुरंगों में संग्रहित है. नई व्यवस्थाओं के बाद इन स्थानों तक पहुंच पहले की तुलना में काफी कठिन हो गई है.

 समझौते पर पड़ सकता है असर

अमेरिका और ईरान के बीच जिस संभावित समझौते पर चर्चा चल रही है, उसमें ईरान द्वारा संवर्धित यूरेनियम सौंपने का प्रस्ताव शामिल बताया गया है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सामग्री को नष्ट करने और देश से बाहर ले जाने की योजना पर विचार किया गया है. हालांकि नए सुरक्षा इंतजाम इस प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं.


सैन्य विकल्प पर विचार कर रहा था अमेरिका

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मई के मध्य में अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने यूरेनियम भंडार को अपने नियंत्रण में लेने की संभावनाओं का अध्ययन किया था. लेकिन जोखिम अधिक होने के कारण इस विकल्प को आगे नहीं बढ़ाया गया. इसके बाद ईरान ने कथित तौर पर अपने भंडारण स्थलों की सुरक्षा और मजबूत कर दी.

विशेषज्ञों ने जताई नई चिंता

परमाणु सामग्री प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये रिपोर्ट सही हैं तो भविष्य में यूरेनियम की पूरी मात्रा का सत्यापन मुश्किल हो सकता है. किसी भी नए समझौते के तहत ईरान को अपने सभी भंडार की जानकारी देनी पड़ सकती है. लेकिन यदि कुछ सामग्री तक पहुंच मुश्किल बताई जाती है, तो उसके सत्यापन को लेकर सवाल बने रह सकते हैं.