जंग के बीच ईरान की सत्ता में दरार! राष्ट्रपति की 'माफी' से भड़के IRGC कमांडर, उठाया ये सख्त कदम
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच ईरान की सत्ता में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की माफी और हमले रोकने के संकेत से कट्टरपंथी गुट नाराज हो गया, जबकि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने हमले जारी रखे.
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान की आंतरिक राजनीति में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के उस बयान ने विवाद खड़ा कर दिया, जिसमें उन्होंने खाड़ी देशों से माफी मांगते हुए हमले न करने का भरोसा दिया था. इस कदम को लेकर देश के कट्टरपंथी नेताओं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के कई कमांडर नाराज बताए जा रहे हैं. घटनाक्रम से यह संकेत मिल रहा है कि ईरान की सत्ता के भीतर अलग-अलग धड़ों के बीच मतभेद उभरने लगे हैं.
राष्ट्रपति के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने हाल ही में कहा था कि यदि ईरान की कार्रवाई से पड़ोसी देशों को नुकसान हुआ है तो वह व्यक्तिगत रूप से इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं. उन्होंने खाड़ी देशों से यह भी अपील की थी कि वे अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर होने वाले हमलों में शामिल न हों. उनके इस बयान को कुछ नेताओं ने नरम रुख माना, जिससे देश के राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई.
कट्टरपंथी गुट की नाराजगी
राष्ट्रपति के बयान के बाद कट्टरपंथी नेताओं और कुछ सांसदों ने खुलकर असहमति जताई. कई नेताओं ने इसे कमजोर संदेश बताते हुए आलोचना की. एक प्रमुख धर्मगुरु और सांसद ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस तरह का रुख ईरान की रणनीति के अनुरूप नहीं है. इसी वजह से राष्ट्रपति कार्यालय को बाद में स्पष्ट करना पड़ा कि देश अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा.
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कड़ा रुख
राष्ट्रपति के आश्वासन के बावजूद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रखी. गार्ड्स की ओर से दावा किया गया कि उनके ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी के पास स्थित अल धाफरा एयर बेस को निशाना बनाया, जहां अमेरिकी सैन्य गतिविधियां संचालित होती हैं. रिपोर्टों के अनुसार दुबई समेत अन्य स्थानों पर भी हमले की खबरें सामने आईं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया.
बढ़ते मतभेद के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम ईरान की सत्ता के भीतर मतभेद की झलक दिखाता है. कुछ विश्लेषकों के अनुसार राष्ट्रपति के बयान को लेकर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कई वरिष्ठ कमांडर असहमत हैं. यही कारण है कि बयान के कुछ समय बाद राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट से माफी वाला हिस्सा हटा दिया. इससे यह साफ हुआ कि ईरान की आंतरिक राजनीति में भी दबाव और मतभेद बढ़ते जा रहे हैं.