IND Vs NZ

इंडोनेशिया में पिछले 30 दिनों में 1400 बार कांपी धरती, इस मुस्लिम देश में आखिर क्यों बार-बार डोल रही है धरती?

इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के पास 6.3 तीव्रता के भूकंप के बीच देश में 30 दिनों में 1,400 झटके दर्ज हुए हैं. रिंग ऑफ फायर पर स्थित होने के कारण क्षेत्र में भूकंपीय खतरा लगातार बढ़ रहा है.

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Sagar Bhardwaj

इंडोनेशिया इन दिनों प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार झेल रहा है. एक तरफ सुमात्रा के पास 6.3 तीव्रता का ताजा भूकंप दहशत फैलाता है, वहीं दूसरी ओर पिछले एक महीने में करीब 1,400 भूकंपीय झटकों ने चिंता और बढ़ा दी है. यह घटनाएं उस समय हो रही हैं जब देश पहले से ही चक्रवात सेन्यार से आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण इस पर लगातार खतरा बना रहता है.

30 दिनों में 1400 भूकंप के झटके

अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (USGS) और वोल्केनोडिस्कवरी के आंकड़ों के मुताबिक, इंडोनेशिया में पिछले 30 दिनों में 1,400 से ज्यादा भूकंप के झटके दर्ज किए गए. इनमें से कई झटकों की तीव्रता 6.4 तक दर्ज की गई. महत्वपूर्ण माने जाने वाले M4.5+ स्तर के करीब 250 झटके सामने आए, जो पिछले छह महीनों में सामान्य रूप से देखे गए 2,300 M4+ भूकंपों की दर को दर्शाते हैं.

रिंग ऑफ फायर की संवेदनशीलता

इंडोनेशिया प्रशांत महासागर की ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जहां विश्व के 90% भूकंप आते हैं. सुमात्रा के नीचे सुंडा मेगाथ्रस्ट पर इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट हर साल 5–7 सेंटीमीटर की गति से यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसकती है. यही दबाव भूकंपों का कारण बनता है. उथले केंद्र वाले झटके ज्यादा नुकसानदेह होते हैं और घनी आबादी वाले इलाकों के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं.

रिंग ऑफ फायर क्या है?

रिंग ऑफ फायर एक हॉर्सशू आकार का विशाल भू-क्षेत्र है, जो प्रशांत महासागर के किनारों पर फैला है. यहां कई टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाएं मिलती हैं, जिससे भूकंप और सुनामी की आशंका हमेशा बनी रहती है. समुद्र के नीचे होने वाले तेज झटके बड़ी मात्रा में पानी विस्थापित कर सुनामी पैदा कर सकते हैं, जैसा हाल ही में कमचटका क्षेत्र में देखने को मिला.

2004 में आया था 9.1 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप

सुमात्रा में हाल में कई जोरदार झटके महसूस हुए, जिनमें 6.6 तीव्रता का एक भूकंप भी शामिल है. यह लगातार सक्रिय प्लेट सीमाओं और लोकल फॉल्ट्स, जैसे ग्रेट सुमात्रा फॉल्ट के तनाव का नतीजा माना जा रहा है. 2004 का 9.1 तीव्रता वाला विनाशकारी भूकंप भी इसी क्षेत्र में आया था. ताजा झटका हालांकि सुनामी का खतरा नहीं लाता, लेकिन बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे उत्तर सुमात्रा में हालात और बिगड़ गए हैं.

राहत कार्यों में तेजी

अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन भारी बारिश और बाढ़ के चलते 8,000 लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए हैं. कई सड़कें मलबे से भरी हैं. प्रशासन आफ्टरशॉक्स पर नजर रखे हुए है और अनुमान है कि आने वाले दिनों में आचेह और रियाउ क्षेत्रों में और बारिश होगी. आपदा एजेंसियां हेलिकॉप्टर की मदद से राहत पहुंचाने में लगी हुई हैं.