सिंधु जल संधि पर भारत के खिलाफ फैसला, पैनल के इन 4 जजों का अमेरिका और पाकिस्तान से है कनेक्शन
सिंधु जल संधि को लेकर हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय के फैसले पर भारत ने असहमति जताई है. पांच जजों की बेंच ने भारत के संधि निलंबन को गलत बताया. इनमें कुछ जजों के अमेरिका और पाकिस्तान से पुराने संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.
नई दिल्ली: हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ फैसला सुनाया है. पांच जजों की बेंच ने भारत की ओर से संधि को निलंबित करने के फैसले को गलत बताया और चिनाब नदी पर भारत की जल विद्युत परियोजना को लेकर भी आदेश दिया. भारत ने इस कार्यवाही को पहले ही अमान्य करार दिया था और सुनवाई में हिस्सा नहीं लिया.
भारत का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को समर्थन दिए जाने के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित किया गया है. नई दिल्ली ने इस मध्यस्थता प्रक्रिया की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं. भारत के अनुसार, जिस मंच को वह मान्यता ही नहीं देता, उसके फैसले को मानना उसके लिए बाध्यकारी नहीं है.
रिपोर्ट में क्या आया सामने?
इस मामले में पाकिस्तान ने अपनी ओर से दलीलें रखीं. रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की तरफ से 20 से अधिक वकील सुनवाई में शामिल हुए. मध्यस्थता न्यायालय ने भारत की अनुपस्थिति में उपलब्ध सामग्री और सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर मामले पर विचार किया.
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5 जजों की बेंच में कौन-कौन?
सीन डी मर्फी
सीन डी मर्फी अमेरिका से हैं और पांच सदस्यीय बेंच का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की और अमेरिकी विदेश विभाग में कानूनी सलाहकार के तौर पर काम किया. वर्ष 2011 से वह संयुक्त राष्ट्र से जुडे रहे हैं.
डब्यू वुट्रेट
डब्यू वुट्रेट बेल्जियम के रहने वाले हैं. उन्होंने केयू लेयुवेन से बायोसाइंस इंजीनियरिंग में पीएचडी की है. जल से जुडे मामलों में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें इस मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल किया गया.
जेफरी पी मिनियर
जेफरी पी मिनियर भी अमेरिका से हैं. वह अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल के पद पर रह चुके हैं. वर्ष 2011 से 2022 तक अमेरिकी विदेश विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने का भी उल्लेख किया जाता है.
शौकत अल ख्शवानेह
शौकत अल ख्शवानेह जॉर्डन के रहने वाले हैं. उन्हें वर्ष 2000 में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक व्यवस्था में जज बनाया गया था. उपलब्ध विवरण के अनुसार, मध्यस्थता प्रक्रिया में उनकी नियुक्ति पाकिस्तान के कोटे से हुई थी.
डोनाल्ड ब्लैकमोरे
डोनाल्ड ब्लैकमोरे ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2011 में पाकिस्तान सरकार ने उन्हें सलाहकार नियुक्त किया था. उनकी भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के जल हितों से जुडे मामलों में काम करने की थी. भारत ने इस मध्यस्थता न्यायालय की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया. इसलिए फैसले को लेकर नई दिल्ली और इस न्यायिक मंच के बीच मतभेद बना हुआ है. वहीं पाकिस्तान इस फैसले को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण मान रहा है.
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जल बंटवारे का आधार रही है. मौजूदा विवाद के बाद इसके भविष्य को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ गया है. भारत ने साफ किया है कि वह उस मंच के फैसले से बाध्य नहीं है जिसकी प्रक्रिया को वह वैध नहीं मानता.