भारत-यूरोप की डील से 'सदमे' में पाकिस्तान! यूरोपीय संघ से मांगने लगा 'भीख'
भारत और यूरोप के बीच फ्री ट्रेड डील फाइनल हो चुका है. इस डील से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है. जीएसपी स्टेटस के साथ यूरोप के बाजार में पाकिस्तान, भारत को टक्कर नहीं दे पा रहा है.
नई दिल्ली: भारत और यूरोप संघ के बीच हुए समझौते ने पूरी दुनिया का ध्यान खिंचा है. इस डील से भारत को बड़ा फायदा मिलने वाला है. इस समझौते की मदद से दो ऐसी अर्थव्यवस्था एक साथ आने वाली है जो दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करती है. अर्थव्यवस्था की मार झेल रहा पाकिस्तान भी इस समझौते को लेकर चिंतित है.
पाकिस्तान ने गुरुवार को कहा कि वह भारत और 27 देशों के ब्लॉक के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर नजर रखे हुए हैं. इस समझौते से पाकिस्तान के एक्सपोर्ट पर होने वाले असर को लेकर यूरोपियन यूनियन से लगातार संपर्क में हैं.
जनरलाइज़्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस स्टेटस क्या है?
यूरोप के बाजारों में पाकिस्तान के प्रोडक्ट को जनरलाइज़्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस स्टेटस की वजह से फायदा मिलता था. इसके तहत पाकिस्तान लगभग 66 प्रतिशत आइटम को जीरो-ड्यूटी के साथ मार्केट में ले जाते थे. वहीं भारत को लगभग 15 प्रतिशत तक का टैक्स भरना पड़ता था.
इससे पाकिस्तान को काफी फायदा होता था, हालांकि अब यूरोप और भारत के बीच हुए समझौते से अधिकतर भारतीय सामान ड्यूटी फ्री होंगे, जिसकी वजह से पाकिस्तान की चिंता काफी ज्यादा बढ़ गई है. पाकिस्तान यूरोप के बाजार में टेक्सटाइल और कपड़ों का एक्सपोर्ट करता था, अब भारत भी ड्यूटी फ्री करेगा. जिससे भारत को काफी फायदा मिलने की उम्मीद है.
मदर ऑफ ऑल डील से पाकिस्तान क्यों परेशान?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को मदर ऑफ ऑल डील कहा है. इस डील से यूरोप के बाजारों में भारत अपने सामान ड्यूटी फ्री के साथ उतारेगा. जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को बूम मिलने वाला है. वहीं पाकिस्तान का जीएसपी स्टेटस अगले साल खत्म होने वाला है, जिसे 2014 में दिया गया था. इसके खत्म होने के बाद पाकिस्तान को टैक्स भी देने पड़ सकते हैं. ऐसे में पाकिस्तान का कारोबार यूरोप के बाजार में ठप हो सकता है.
इसी वजह से गरीबी का मार झेल रहा पाकिस्तान यूरोपियन यूनीयन के साथ लगातार डील क्रैक करने की कोशिश में जुटा हुआ है. पाकिस्तान के टेक्सटाइल एसोसिएशन प्रमुख ने इस बात को माना भी है कि यूरोप के बाजार में भारत काफी ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो गया है. पाकिस्तान में इस समय अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है, ऐसे में भारत का यह डील एक पड़ोसी मुल्क के लिए एक ओर झटका है. हालांकि इस डील से ना केवल पाकिस्तान बल्कि अमेरिका जैसे बड़े देश भी सोच में हैं.