ग्रीनलैंड पर ट्रंप का राग EU को नहीं आया रास, अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर लगाया ब्रेक
ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान और टैरिफ धमकियों के बाद यूरोपीय संसद ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते पर काम रोक दिया है, जिससे ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में नया तनाव पैदा हुआ है.
नई दिल्ली: यूरोप और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता एक बार फिर विवादों में घिर गई है. डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग और यूरोपीय सहयोगियों को टैरिफ की धमकी देने के बाद यूरोपीय संसद ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर काम निलंबित करने का फैसला लिया है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वैश्विक मंच पर रणनीतिक क्षेत्रों और व्यापार संतुलन को लेकर बहस तेज होती जा रही है.
दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के अलावा कोई और देश इस आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा नहीं कर सकता. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अतीत में ग्रीनलैंड को छोड़ना एक बड़ी भूल थी और डेनमार्क इसे अकेले सुरक्षित रखने में सक्षम नहीं है.
यूरोपीय संसद का कड़ा कदम
ट्रंप के ताजा बयानों के बाद यूरोपीय संसद में नाराजगी खुलकर सामने आई. संसद के एक सदस्य ने बताया कि इन्हीं टिप्पणियों के चलते व्यापार समझौते से जुड़ा काम रोकने का फैसला लिया गया. ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और इस पर किसी भी तरह की अमेरिकी दावेदारी को यूरोपीय संघ अपने प्रभुत्व के लिए चुनौती मान रहा है.
व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि
यूरोपीय संसद अमेरिका से आयात होने वाले कई उत्पादों पर शुल्क कम करने के प्रस्तावों पर चर्चा कर रही थी. इनमें अमेरिकी लॉब्स्टर पर शून्य शुल्क को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल था, जिसकी शुरुआत 2020 में हुई थी. ये प्रस्ताव जुलाई के अंत में स्कॉटलैंड के टर्नबेरी में हुए समझौते का हिस्सा थे और संसद व सदस्य देशों की मंजूरी जरूरी थी.
असंतुलित शर्तों पर सवाल
कई यूरोपीय सांसदों ने इस व्यापार समझौते को एकतरफा करार दिया. उनका तर्क है कि यूरोपीय संघ को अधिकांश आयात शुल्क घटाने पड़ते, जबकि अमेरिका 15 प्रतिशत तक का व्यापक टैरिफ बनाए रखता. इसके बावजूद पहले संसद इस समझौते को कुछ शर्तों जैसे 18 महीने की समयसीमा और सुरक्षा उपायों के साथ स्वीकार करने के मूड में दिख रही थी.
यूरोपीय संसद की व्यापार समिति 26 और 27 जनवरी को मतदान कर अपनी स्थिति तय करने वाली थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया टाल दी गई है. समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लांगे ने कहा कि नई टैरिफ धमकियों ने टर्नबेरी समझौते की भावना को तोड़ दिया है. इस फैसले से अमेरिका की ओर से जवाबी टैरिफ बढ़ने का खतरा भी बना हुआ है, जिससे दोनों पक्षों के संबंध और जटिल हो सकते हैं.