साजिश या नई रणनीति! ईरान युद्ध के बीच पीएम मोदी और ट्रंप के फोन कॉल में शामिल हुए एलन मस्क - रिपोर्ट
ईरान युद्ध के बीच मोदी और ट्रंप की बातचीत में एलन मस्क की मौजूदगी ने कूटनीतिक नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति इस चर्चा का मुख्य मुद्दा रहा.
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. एलन मस्क ने नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई एक अहम फोन कॉल में हिस्सा लिया. यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है. युद्ध जैसे संवेदनशील समय में किसी निजी व्यक्ति की ऐसी बातचीत में मौजूदगी को असामान्य माना जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार यह कॉल उस समय हुई जब मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और ईरान की गतिविधियों को लेकर चिंता गहराई हुई है. खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चर्चा हुई, जो दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम रास्ता है. यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का व्यापार होता है, इसलिए किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है.
एलन मस्क की मौजूदगी क्यों उठ रहे सवाल?
बताया गया है कि इस कॉल में एलन मस्क की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. वह किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, फिर भी उनका इस स्तर की बातचीत में शामिल होना कूटनीतिक परंपराओं से अलग माना जा रहा है. अभी यह साफ नहीं है कि उन्होंने बातचीत में सक्रिय भूमिका निभाई या सिर्फ मौजूद रहे.
रिपोर्ट में क्या आया सामने?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मस्क की मौजूदगी उनके और डोनाल्ड ट्रंप के बीच सुधरते रिश्तों का संकेत हो सकती है. मस्क के व्यापारिक हित भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं, क्योंकि उनकी कंपनियां अंतरिक्ष, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करती हैं, जिन पर इस संकट का असर पड़ सकता है.
पीएम मोदी ने संसद में क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि भारत अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है. इस बीच वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे एशिया के कई देशों में चिंता का माहौल है.
हालांकि इस कॉल को लेकर आधिकारिक बयान में एलन मस्क का नाम नहीं लिया गया. व्हाइट हाउस और भारत सरकार दोनों ने इस पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है. इससे यह मामला और भी रहस्यमय बन गया है.
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