US Israel Iran War

'कुछ ही दिनों में अपनी योजना बताएं...', होर्मुज की सुरक्षा को लेकर ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों को दिया अल्टीमेटम

अमेरिका ने यूरोपीय सहयोगियों को होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए कुछ दिनों में ठोस योजना देने का अल्टीमेटम दिया है.

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Sagar Bhardwaj

दुनिया की सबसे अहम ऊर्जा सुरंग यानी होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप से साफ कह दिया है कि सिर्फ समर्थन की बयानबाजी से काम नहीं चलेगा. अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय देश कुछ ही दिनों में बताएं कि वे होर्मुज में नेविगेशन की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाएंगे. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह मांग व्हाइट हाउस, पेंटागन और स्टेट डिपार्टमेंट में हुई उच्च स्तरीय बैठकों में उठी है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों के संघर्षविराम ने कूटनीति की एक किरण दिखाई है, लेकिन जमीनी हालात अब भी अस्थिर हैं.

यूरोप के सामने मुश्किल घड़ी

अमेरिकी प्रशासन की इस मांग ने नाटो देशों के बीच मतभेद को उजागर कर दिया है. हाल के हफ्तों में कई यूरोपीय देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखी थी. ये देश तब होर्मुज में कदम रखने को तैयार नहीं थे, जब लड़ाई जारी थी. ट्रंप ने इस रवैये की खुलकर आलोचना की है. नाटो प्रमुख मार्क रुते के साथ बैठक के बाद उन्होंने लिखा, "जब हमें जरूरत थी तब नाटो वहां नहीं था, और अगर फिर जरूरत पड़ी तो वह नहीं होगा." यह बयान वाशिंगटन की उस नाराजगी को दिखाता है, जो उसे अपने सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन न मिलने पर हो रही है. रुते के लिए यह पल बेहद मुश्किल है, क्योंकि वह पहले ट्रंप के साथ संबंध संभाल चुके हैं, लेकिन अब ईरान संघर्ष से लेकर रक्षा खर्च को लेकर कई मोर्चों पर दबाव झेल रहे हैं.

 युद्धविराम के बाद भी जारी है हिंसा

हालात की नाजुकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 14 दिनों के युद्धविराम की घोषणा के बाद भी लड़ाई पूरी तरह नहीं रुकी है. ईरान ने लेबनान में जारी इजरायली हमलों को समझौते का उल्लंघन बताया है. होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी काफी हद तक बंद है, और सामान्य आवाजाही शुरू होने के कोई संकेत नहीं हैं. ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ ने साफ कहा है कि लेबनान और पूरा प्रतिरोध अक्ष उनके सहयोगी हैं, और वे 10-सूत्री प्रस्ताव के तहत संघर्षविराम का अभिन्न हिस्सा हैं. इस वादे और जमीनी हकीकत के बीच जो खाई है, वही वाशिंगटन की चिंता बढ़ा रही है. अमेरिका सुनिश्चित करना चाहता है कि अगर युद्धविराम टिकता है, तो होर्मुज से जहाजों की आवाजाही शुरू करने में कोई देरी न हो.

11 अप्रैल को ईरान और अमेरिका में होगी सीधी बातचीत

अमेरिकी अधिकारी लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि सहयोगियों को और अधिक करना होगा. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इशारा दिया है कि अगर समर्थन नहीं बढ़ा तो अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं पर पुनर्विचार कर सकता है. इस बीच, कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में ईरान के साथ सीधी बातचीत के लिए अमेरिकी टीम का नेतृत्व करेंगे. इस वार्ता का मकसद स्थायी युद्धविराम स्थापित करना है. ब्रिटेन के नेतृत्व में 40 से अधिक देशों के गठबंधन (जिसमें यूरोप, जापान और कनाडा शामिल हैं) ने होर्मुज को फिर से खोलने में मदद करने की बात कही है. यह मार्ग दुनिया के लगभग एक-पांचवें तेल और गैस की ढुलाई करता है. अब सब कुछ इस बात पर टिका है कि युद्धविराम टिकता है या नहीं, और सहयोगी कितनी तेजी से जवाब देते हैं.