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2030 में दुनिया से खत्म हो जाएगी चॉकलेट, ईस्टर पर कड़वी न्यूज से करोड़ों लोगों का टूटा दिल

चॉकलेट प्रेमियों को चेतावनी दी जा रही है कि एक दिन वे अपनी पसंदीदा चॉकलेट खो सकते हैं, क्योंकि उत्पादकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कोको उद्योग घुटनों पर है.

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Mayank Tiwari

ईस्टर के मौके पर चॉकलेट प्रेमियों के लिए एक गंभीर चिंता सामने आई है. कोको की आपूर्ति में तेज गिरावट के कारण चॉकलेट उद्योग संकट में है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 5 सालों में कोको की आपूर्ति पूरी तरह से समाप्त हो सकती है. कोको उगाने वाले किसान, जो पश्चिम अफ्रीका के आइवरी कोस्ट में स्थित हैं, उन्होंने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती कीमतों के कारण कोको उत्पादन में भारी कमी आई है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश दुकानदारों को इस ईस्टर पर अंडे जैसे कई चॉकलेट उत्पादों को खरीदने के लिए 50% तक की कीमत वृद्धि का सामना करना पड़ेगा. लेकिन लागत में वृद्धि के बावजूद, आपूर्ति श्रृंखला के दूसरे छोर पर किसानों को बहुत कम वित्तीय लाभ मिलता है.

जलवायु परिवर्तन और उत्पादन में गिरावट

आइवरी कोस्ट में स्थित येस्सो, एक किसान सहकारी संस्था, ने बताया कि पिछले कुछ सालों में उनकी 5,000 कोको उत्पादकों की उत्पादन क्षमता में 30% की गिरावट आई है. किसान अब रबड़ और ताड़ के पौधों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि इन्हें बेहतर वेतन मिल रहा है.

34 वर्षीय कोको किसान बियाबटे पोसेनी ने कहा, "जलवायु परिवर्तन का असर हमारी उपज पर बहुत गहरा हो रहा है. जब हमें बारिश की जरूरत होती है, तो बारिश नहीं होती, और जब हमें सूरज चाहिए होता है, तो इसके बजाय बहुत बारिश हो जाती है.अगर 2030 तक कुछ नहीं किया गया, तो हमारे पास कोई कोको के पेड़ नहीं होंगे, क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण सारे पेड़ नष्ट हो जाएंगे."

उत्पादन में कमी और उसका असर

आइवरी कोस्ट कृषि मंत्रालय के क्षेत्रीय निदेशक थॉमस अडेई ने बताया कि 1960 के दशक में अत्यधिक उत्पादन ने अस्थिर प्रथाओं को जन्म दिया, जिससे व्यापक जंगलों की कटाई हुई और कोको उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ा. उन्होंने कहा, "यह जंगलों की अत्यधिक खपत थी, जिससे कोको उत्पादन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा."

सरकारी प्रयास और समाधान

इस संकट को हल करने के लिए आइवरी कोस्ट सरकार सक्रिय रूप से समाधान पर काम कर रही है. फादिगा ममादो डिये, बाफिंग-टोंकी क्षेत्र के कैफे-कोको बोर्ड के प्रमुख, ने किसानों के लिए एक आईडी कार्ड पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत किसानों की सालाना उपज, पेड़ की संख्या और एग्रोफॉरेस्ट्री प्रयासों का डेटा संग्रहित किया जा रहा है. इसके साथ ही डिये ने चेतावनी दी कि, "अगर अधिकांश हिस्सेदार इन चुनौतियों को लेकर गंभीर नहीं होते, तो एक दिन सहकारी समितियां गायब हो जाएंगी.