एशियाई देशों में क्यों हो रहे इतने उग्र विरोध प्रदर्शन? बांग्लादेश से पहले इन देशों में पल भर में बदल गई सरकार

Bangladesh Protest: बांग्लादेश हिंसक विरोध प्रदर्शन की आग में जल रहा है. आरक्षण के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गए. सोमवार को शेख हसीना ने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को अपना इस्तीफा सौंप दिया और देश छोड़कर भारत के लिए रवाना हो गईं. रिपोर्ट के मुताबिक, सेना ने बेकाबू होते हालात के चलते उन्हें 45 मिनट का समय दिया था जिससे कि वे जल्दी से जल्दी देश छोड़कर सुरक्षित जगह पर पहुंच सकें. बांग्लादेश के ताजा विरोध प्रदर्शन बीते कुछ सालों में एशियाई देशों के अंदर हुए सत्ता परिवर्तन की याद दिला रहे हैं.

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Bangladesh Protest: दक्षिण एशियाई देश बांग्लादेश में कई सप्ताह से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया. सेना प्रमुख वकर-उज-जमान की ओर से यह घोषणा तब की गई जब प्रदर्शनकारियों ने राजधानी ढाका में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास गणभवन पर धावा बोल दिया. सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि देश के अंदर ही जल्द ही अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा.  सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि वे तोड़-फोड़ ना करें, सेना पर भरोसा करें. सेना प्रमुख ने कहा कि हम बेकाबू हालात पर जल्द ही नियंत्रण स्थापित कर लेंगे.  

शेख हसीना ने इस्तीफा सौंपने के बाद भारत की शरण ली है. वह एक स्पेशल विमान के जरिए हिंडन एयरबेस पर उतरीं. सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली में कुछ देर रुकने के बाद वह लंदन के लिए रवाना हो जाएंगी. रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में तख्तापलट से पहले सेना ने शेख हसीना को 45 मिनट का समय दिया था. इसके बाद उन्होंने आनन-फानन में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन का इस्तीफा सौंपा और अपनी बहन शेख रेहाना के साथ भारत के लिए रवाना हो गईं. 

बांग्लादेश के ताजा घटनाक्रम ने एशियाई देशों में हाल के कुछ सालों में हुए आक्रामक जनविद्रोह की यादों को ताजा कर दिया है. एशिया के अंदर बीते दो सालों के अंदर कई देशों की सरकारें पल भर में बदल गईं. आइए उन देशों के बारे में जान लेते हैं जहां बीते कुछ सालों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं और वहां की सरकारें बदली हैं. 

बांग्लादेश में आरक्षण का विरोध

गुस्साए प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री हसीना के घर में प्रवेश कर गए हैं. वायरल तस्वीरों में हसीना के घर के पास वाहनों से आग की लपटें निकलती दिख रही हैं. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दिन पहले सेना और पुलिस ने इलाके में रैली निकाल रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की थी. पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी भड़क गए. रविवार को भड़की हिंसा में बांग्लादेश में कम से कम 91 लोगों की मौत हो गई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सरकारी नौकरियों में आरक्षण समाप्त करने की मांग को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के मध्य जुलाई से लेकर अब तक सैकड़ों झड़पें हुई हैं. 


श्रीलंका का आर्थिक संकट

भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका विदेशी मुद्रा की कमी के कारण खाद्यान्न, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात करने में असमर्थ था. गंभीर आर्थिक संकट के कारण श्रीलंका में बड़े पैमाने पर जनविद्रोह हुआ. गुस्साए लोगों ने तत्कालीन राष्ट्रपति राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के आधिकारिक आवासा पर धावा बोल दिया और उनके इस्तीफे की मांग की. व्यापक जनादोंलन की वजह से राष्ट्रपति को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. श्रीलंका की मदद के लिए IMF ने कुछ शर्तों के साथ ऋण देने की पेशकश की. पिछले साल मार्च माह में IMF ने कोलंबो को 2.9 बिलियन डॉलर का बेलआउट पैकेज दिया था. आईएमएफ के बेलआउट पैकेज को लेने के लिए श्रीलंकाई सरकार ने करों में वृद्धि की. हाल ही में श्रीलंकाई राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने एक कार्यक्रम में कहा था कि उनका देश आईएमएफ की मदद के बाद आर्थिक संकट से धीरे-धीरे उबर रहा है. 


पाकिस्तान का अविश्वास प्रस्ताव 

पाकिस्तान के वित्तीय संकट के बीच पीटीआई चीफ इमरान खान को अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद अप्रैल 2022 से अगस्त 2023 तक शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने पाकिस्तान की सरकार चलाई.  इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर सरकार ने दर्जनों मुकदमें किए. एक मुकदमे की सुनवाई के लिए कोर्ट जाते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. खान की गिरफ्तारी से उनके समर्थक भड़क गए. प्रदर्शनकारियों ने सेना और आईएसआई हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया. इमरान खान अभी भी कई मामलों में सजायाफ्ता हैं. इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं. 


म्यांमार में सेना का तख्तापलट 

देश की निर्वाचित नेता आंग सान सू की ने साल 2020 में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल करके सरकार बनाई थी. उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ( NLD) ने देश की 476 सीटों में से 396 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस जीत से नाखुश म्यांमार की सेना ने 1 फरवरी 2021 को तख्तापलट कर दिया और सत्ता पर कब्जा जमा लिया.  सत्ता पर कब्जा जमाने के बाद सेना ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा कर दी. सू की और उनकी पार्टी के कई नेता अब भी जेल में हैं तो कई को फांसी दी जा चुकी है. इस दौरान सेना ने चार तख्तापलट विरोधी कार्यकर्ताओं को भी फांसी पर लटका दिया. म्यांमार के पिछले 32 सालों के इतिहास में किसी को मृत्युदंड दिए जाने का यह पहला मामला था. चुनाव का आश्वासन दिए जाने के बाद भी लोकतांत्रिक सरकार का चयन ना होने से नाराज म्यामांर की जनता ने जुंटा शासन को खारिज कर दिया है.  सेना के तख्तापलट का विरोध करने वाले कई सशस्त्र समूहों ने सेना के खिलाफ संघर्ष शुरू किए हैं.  25 जुलाई को चीनी कोकांग अल्पसंख्यक का एक विद्रोही बल म्यांमार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सेना (MNDAA) ने घोषणा करते हुए कहा कि उसने जुंटा सरकार के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल कर ली है और लाशियो शहर पर अपना कब्जा जमा लिया है. म्यांमार के सैन्य शासन ने भी सोमवार को स्वीकार किया है कि उत्तर-पूर्व में उसके रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सेना मुख्यालय के कमांडरों के साथ उसका संपर्क टूट गया है.