'शेख हसीना को वापस भेजो', बांग्लादेश में चुनाव जीतते ही बीएनपी ने दोहराई मांग, अब क्या करेगा भारत?
नवंबर 2025 में बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई.
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने गुरुवार को हुए आम चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की. पार्टी ने 300 सीटों वाली संसद में 200 से ज्यादा सीटें जीतीं. तारिक रहमान की अगुवाई वाली बीएनपी 20 साल बाद सत्ता में लौट रही है. जीत के अगले ही दिन शुक्रवार को बीएनपी ने फिर से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस बांग्लादेश लाने की मांग दोहराई. पार्टी का कहना है कि हसीना को वहां मुकदमा चलाने के लिए भेजा जाए.
हम प्रत्यर्पण की मांग करते रहेंगे
बीएनपी की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने ढाका में पत्रकारों से कहा, “हम कानून के मुताबिक हसीना की प्रत्यर्पण (extradition) की मांग करते रहेंगे. विदेश मंत्री पहले से ही इस मामले को उठा चुके हैं, और हम उनका समर्थन करते हैं. हम भारत सरकार से अपील करेंगे कि उन्हें वापस भेजें ताकि बांग्लादेश में मुकदमा चले.” उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सभी पड़ोसी देशों, खासकर भारत के साथ सामान्य रिश्ते चाहता है, लेकिन ये रिश्ते बराबरी और सम्मान पर आधारित होने चाहिए.
हसीना पर क्या हैं आरोप?
बता दें कि शेख हसीना को अगस्त 2024 में छात्र विद्रोह के बाद अपदस्थ कर दिया गया था. तब से वे दिल्ली में रह रही हैं. नवंबर 2025 में बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई. आरोप है कि 2024 के विरोध प्रदर्शन को दबाने में हिंसा हुई, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए. वहीं हसीना ने 12 फरवरी को चुनाव को 'नकली' बताया था.
भारत का रुख क्या है?
भारत ने पहले कहा था कि हसीना का प्रत्यर्पण अनुरोध मिला है और इसे कानूनी प्रक्रिया में देखा जा रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने नवंबर में कहा, “हम बांग्लादेश के लोगों के हित, शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं. सभी पक्षों से बातचीत जारी रखेंगे.” दोनों देशों के बीच 2013 का प्रत्यर्पण समझौता है, लेकिन भारत ने अभी तक साफ नहीं किया है कि वह शेख हसीना के मामले पर क्या स्टैंड लेगा.
बीएनपी रविवार तक सरकार बनाने की तैयारी में है. नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सामने हसीना का मुद्दा बड़ा चैलेंज होगा. उनकी पार्टी चुनाव में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाती रही. उनकी ओर से भारत के साथ रिश्ते सुधारने की बात भी हो रही है, लेकिन हसीना की वापसी पर दबाव बढ़ेगा. बांग्लादेश में नई सरकार बनने से राजनीति में नया मोड़ आया है. लोग उम्मीद कर रहे हैं कि न्याय होगा और रिश्ते मजबूत रहेंगे.