बांग्लादेश में शेख हसीना का 12 करोड़ का सोना जब्त, बैंक लॉकर खोलते ही अधिकारियों के उड़े होश
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बैंक लॉकर से भारी मात्रा में सोना मिलने का मामला सुर्खियों में है. बुधवार को एंटी करप्शन अधिकारियों ने बताया कि हसीना के बैंक लॉकर से 850 तोला यानी लगभग 10 किलो सोना जब्त किया गया है. इसकी अनुमानित कीमत 11 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है.
नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बैंक लॉकर से भारी मात्रा में सोना मिलने का मामला अब सुर्खियों में है. बुधवार को एंटी करप्शन अधिकारियों ने बताया कि हसीना के बैंक लॉकर से 850 तोला यानी लगभग 10 किलो सोना जब्त किया गया है. इसकी अनुमानित कीमत 11 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है.
CIC की टीम ने की कार्रवाई
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ यह कार्रवाई नेशनल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (NBR) के सेंट्रल इंटेलिजेंस सेल (CIC) की टीम ने की है. अधिकारियों के अनुसार, यह लॉकर सितंबर में जब्त किया गया था और अदालत के आदेश के बाद इसे खोला गया. एक सीनियर अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि लॉकर से सोने के सिक्के, बिस्कुट और कई गहने मिले है.
तोहफों को सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रधानमंत्री के पद रहते समय शेख हसीना को जो तोहफे मिले थे, उनमें से कुछ तोहफों को उन्होंने सरकारी खजाने में जमा नहीं कराया था. जबकि बांग्लादेश में कानून के अनुसार, सरकारी पद पर मिले सभी कीमती उपहारों को तोशाखाना में जमा करना अनिवार्य है. इसके अलावा, एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या हसीना ने अपनी टैक्स फाइलिंग में इस सोने की जानकारी दी थी या नहीं. अधिकारियों का कहना है कि सोने की बरामदगी के बाद टैक्स चोरी की जांच और तेज कर दी गई है.
शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई गई
आपको बता दें कि हाल ही में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई गई थी. अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने उन्हें मानवता के विरुद्ध पांच गंभीर अपराधों का दोषी पाया और मौत की सजा सुनाई. साथ ही, उन्हें तीन दिनों के भीतर गिरफ्तार करने का भी आदेश दिया था.
शेख हसीना के मामले में 453 पृष्ठों का फैसला छह भागों में पढ़ा गया. न्यायमूर्ति गुलाम मुर्तजा की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह फैसला सुनाया था. न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और न्यायमूर्ति मोहम्मद मोहितुल हक इनाम चौधरी ने भी इस फैसले की अध्यक्षता की.
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